जेफ़रीज़ का बड़ा दांव आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट से निवेश हटाकर महिंद्रा एंड महिंद्रा में किया निवेश
जेफ़रीज़ के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटजी, क्रिस वुड ने आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट में अपना पुराना निवेश बेच दिया है और उस रकम को महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) के शेयरों में ट्रांसफर कर दिया है। क्रिस वुड का मानना है कि महिंद्रा एंड महिंद्रा आने वाले समय में ज्यादा कमाई करेगी और बाजार में बड़ा हिस्सा हासिल करेगी।
आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट में शानदार रिटर्न
क्रिस वुड ने बताया कि जुलाई 2021 से अब तक आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट (जिसे पहले सेंचुरी टेक्सटाइल्स कहा जाता था) के शेयर में 183% की बढ़त देखने को मिली है। इस बेहतरीन रिटर्न के बाद उन्होंने अपने निवेश को महिंद्रा एंड महिंद्रा में शिफ्ट करने का फैसला लिया।

जेफ़रीज़ ने महिंद्रा के लिए दिया ₹4200 का टारगेट प्राइस
28 अगस्त के लेटेस्ट न्यूज़लेटर में, जेफ़रीज़ ने M&M को लेकर पॉजिटिव आउटलुक जारी किया है और ₹4200 का टारगेट प्राइस दिया है, जो मौजूदा शेयर प्राइस से अच्छी बढ़त का संकेत देता है।
महिंद्रा एंड महिंद्रा की ग्रोथ स्टोरी
जेफ़रीज़ की रिपोर्ट के अनुसार:
- महिंद्रा की कमाई (Earnings) 2025 से 2028 के बीच हर साल 19% बढ़ने की संभावना है।
- वाहन बिक्री में 12% वार्षिक वृद्धि का अनुमान है।
- प्रति शेयर आय (EPS) में 19% सालाना ग्रोथ की उम्मीद है।
ब्रोकरेज का मानना है कि महिंद्रा के शेयरों में लंबी अवधि के लिए बेहतरीन संभावनाएं हैं।
बाजार हिस्सेदारी में बदलाव
नए कार मॉडलों और एसयूवी की बढ़ती मांग के चलते महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री में तेजी आई है।
- FY2026 Q1 में M&M की मार्केट शेयर 15% रही, जिससे यह देश की दूसरी सबसे बड़ी पैसेंजर व्हीकल निर्माता कंपनी बन गई।
- मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी 39% पर आ गई, जो पिछले 13 सालों में सबसे कम है।
- हुंडई 13% हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है, जो 2009 के बाद से इसकी सबसे कम हिस्सेदारी है।
जेफ़रीज़ का वैल्यूएशन और जोखिम
- महिंद्रा के ऑटो और ट्रैक्टर बिजनेस का वैल्यूएशन सितंबर 2027 की अनुमानित आय से 26 गुना है।
- कंपनी की अन्य सहायक इकाइयों के लिए ₹487 प्रति शेयर का अतिरिक्त मूल्य जोड़ा गया है।
हालांकि रिपोर्ट में कुछ जोखिम भी बताए गए हैं:
- ट्रैक्टर और एसयूवी की बिक्री उम्मीद से कम होना।
- नई एसयूवी या EV मॉडलों की मांग में कमी।
- 2027 के उत्सर्जन मानकों को पूरा करने में चुनौती।
