NSE ने आयोजित किया मॉक ट्रेडिंग सेशन, जानिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रक्रिया
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 30 अगस्त, शनिवार को एक मॉक ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया। यह सत्र NSE की मार्केट प्रिपेयर्डनेस (Market Preparedness) रणनीति का हिस्सा है, जिसमें ब्रोकरों को अनिवार्य सॉफ्टवेयर माइग्रेशन से पहले अपने सिस्टम को टेस्ट करने का मौका मिलता है।
मॉक ट्रेडिंग का शेड्यूल
- प्री-मार्केट सेशन सुबह 9:00 बजे
- लाइव ट्रेडिंग सुबह 9:15 बजे से 10:10 बजे तक
- री-लॉगिन विंडो दोपहर 1:30 बजे से 2:00 बजे तक
इस सत्र का उद्देश्य था कनेक्टिविटी चेक करना और सिस्टम की स्थिरता सुनिश्चित करना।

क्यों ज़रूरी है यह मॉक सेशन?
- यह ड्रिल NEAT+ सॉफ्टवेयर के नए वर्ज़न 7.8.3 पर माइग्रेशन से पहले की गई।
- पुराना वर्ज़न 7.8.2 को 6 सितंबर के बाद बंद कर दिया जाएगा।
- NSE ने ब्रोकरों को समय पर माइग्रेशन करने पर जोर दिया ताकि मार्केट में किसी भी तकनीकी गड़बड़ी को रोका जा सके।
मॉक ड्रिल की खास बातें
- मॉक ट्रेडिंग के दौरान सभी ट्रेड केवल सिमुलेशन होते हैं, इनका असली पेमेंट या सेटलमेंट नहीं होता।
- यह सेशन ब्रोकरों को ऑर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (OMS) की टेस्टिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर चेक और नए प्रोडक्ट की टेस्टिंग करने का मौका देता है।
- NSE का कहना है कि ऐसे सेशन से संभावित गड़बड़ियों को समय पर पहचानने में मदद मिलती है, जिससे मार्केट का रेज़िलिएंस और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है।
NSE का उद्देश्य
NSE ने कहा कि मॉक ड्रिल्स से पहले ही किसी भी टेक्निकल इश्यू की पहचान हो जाती है, जिससे रियल मार्केट पर असर पड़ने से बचा जा सकता है।
