SEBI और फैमिली ऑफिसेज़ नया नियम या अफवाह?
हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) अब भारत के अमीर परिवारों द्वारा बनाए गए फैमिली ऑफिसेज़ को अपने नियमों के दायरे में लाना चाहता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, SEBI यह जानना चाहता है कि ये ऑफिसेज़ पब्लिक मार्केट यानी शेयर बाजार में कैसे निवेश करते हैं, साथ ही उनसे निवेश की जानकारी, संपत्ति की स्थिति और स्ट्रक्चर से जुड़े डेटा की मांग की जा सकती है।
SEBI ने किया खंडन
SEBI ने इन रिपोर्ट्स का खंडन किया है। यानी, फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक कदम नहीं उठाया गया है।
क्या होते हैं फैमिली ऑफिसेज़?
फैमिली ऑफिस वे इन्वेस्टमेंट फर्म हैं जिन्हें बहुत अमीर परिवार अपनी संपत्ति को मैनेज करने के लिए बनाते हैं। इनका काम है

- स्टार्टअप्स में निवेश करना
- प्राइवेट कंपनियों में हिस्सेदारी लेना
- IPO और शेयर बाजार में पैसा लगाना
भारत में पिछले दो दशकों में फैमिली ऑफिसेज़ की संख्या और ताकत काफी बढ़ी है।
भारत के बड़े फैमिली ऑफिसेज़
भारत में मुकेश अंबानी और गौतम अडानी जैसे अरबपति बिजनेस फैमिली अपने अरबों डॉलर की संपत्ति को फैमिली ऑफिसेज़ के जरिए मैनेज करते हैं। ऐसे में, इनकी गतिविधियों पर नजर रखना बाजार की स्थिरता के लिए जरूरी माना जाता है।
भारत में मौजूदा नियम
- भारत में फिलहाल फैमिली ऑफिसेज़ के लिए कोई अलग से नियम नहीं हैं।
- अधिकतर ये AIFs (Alternative Investment Funds) या NBFCs (Non-Banking Finance Companies) के जरिए निवेश करते हैं।
- इस कारण, उन पर सीधे SEBI का नियंत्रण नहीं होता, लेकिन इन माध्यमों से वे अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित रहते हैं।
दुनिया में फैमिली ऑफिसेज़ के नियम
- सिंगापुर बड़े फैमिली ऑफिसेज़ को टैक्स छूट मिलती है, बशर्ते उनके पास तय सीमा से ज्यादा संपत्ति हो।
- हांगकांग अगर कोई फैमिली ऑफिस एक से ज्यादा परिवारों का पैसा मैनेज करता है (Multi-Family Office), तो उसे लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
