एफआईआई फिर बने नेट बायर्स की नेट खरीदारी
शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में ₹308.98 करोड़ की नेट खरीदारी की।
कई महीनों की लगातार बिकवाली के बाद यह संकेत दे रहा है कि विदेशी निवेशक अब दोबारा भारतीय इक्विटी बाजार में भरोसा जताने लगे हैं।
पिछले एक साल में FIIs ने भारतीय बाजारों से करीब ₹2 लाख करोड़ की भारी बिकवाली की थी। हालांकि, अब उनके व्यवहार में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
इमर्जिंग मार्केट में भारत की मजबूत स्थिति
भारत की स्थिति अभी भी Emerging Market (EM) इंडेक्स में मजबूत बनी हुई है।
जनवरी 2009 में भारत का वजन जहां 6% था, वहीं अब यह लगभग 18% तक पहुंच गया है।
हालांकि, यह अभी भी अगस्त 2024 के 22% के उच्च स्तर से नीचे है।
कोविड के बाद FIIs ने भारत में अंडरवेट पोजिशनिंग अपनाई थी और 2023–2025 के दौरान उन्होंने उत्तर एशिया (North Asia) की ओर रुख किया, क्योंकि वहां टेक्नोलॉजी सेक्टर में बेहतर अर्निंग रिविज़न और ग्रोथ अवसर थे।
अब धीरे-धीरे भारत में स्थिरता, घरेलू मांग और नीति समर्थन के चलते फंड्स की वापसी की संभावना बढ़ रही है।

जीएसटी दरों में कटौती से बढ़ेगी खपत
हाल ही में की गई जीएसटी दरों में कटौती से आने वाले महीनों में कंज्यूमर डिमांड में मजबूती आने की उम्मीद है।
यह सुधार वित्त वर्ष 2026 (FY26) की अर्निंग ग्रोथ को सपोर्ट करेगा, खासकर कमोडिटी और उपभोक्ता आधारित क्षेत्रों में।
FY27 में ग्रोथ अधिक व्यापक (broad-based) होने की संभावना है, जो बाजार की स्थिरता को और मजबूत करेगी।
MSCI India Index का प्रदर्शन और प्रीमियम वैल्यूएशन
भारत अन्य उभरते बाजारों की तुलना में अभी भी प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है।
- MSCI India Index वर्तमान में लगभग 25.1x TTM P/E पर कारोबार कर रहा है।
- इसके मुकाबले MSCI Emerging Markets Index 16.4x और चीन का इंडेक्स 15.6x पर है।
इसका अर्थ है कि भारतीय बाजार EM के मुकाबले 53% और चीन के मुकाबले 61% के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।
हालांकि, पिछले दो वर्षों में यह अंतर कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन भारत की ग्रोथ पोटेंशियल इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाए रखती है।
एफआईआई स्वामित्व में गिरावट लेकिन सुधार की संभावना
भारतीय इक्विटी में FIIs का स्वामित्व अभी भी ऐतिहासिक औसत से नीचे है।
- Nifty 50 में FII होल्डिंग दिसंबर 2020 के 28% से घटकर जून 2025 में 25% पर आ गई।
- वहीं Nifty 500 में FII स्वामित्व 23% से घटकर 20% तक पहुंच गया है।
यह कम स्वामित्व आने वाले समय में संभावित अपसाइड (Potential Upside) का संकेत देता है, क्योंकि जब विदेशी निवेशक दोबारा बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू करेंगे, तो बाजार में नई ऊंचाइयां देखने को मिल सकती हैं।
निष्कर्ष
विदेशी निवेशकों की हालिया ₹308.98 करोड़ की नेट खरीदारी बाजार में एक सकारात्मक संकेत है।
भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, जीएसटी सुधारों से बढ़ती खपत और आकर्षक वैल्यूएशन यह दर्शाते हैं कि आने वाले महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट में FII निवेश की वापसी देखी जा सकती है।
