VLS Finance Ltd के शेयर प्राइस में 17% की बड़ी तेजी
VLS Finance Ltd के शेयरों में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली और स्टॉक 17% तक उछल गया। पिछले एक महीने में ही कंपनी के शेयर प्राइस में 20% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। यह रैली कंपनी की बड़ी घोषणा के बाद आई।
VLS Finance ने किया ₹100 करोड़ का शेयर बायबैक ऐलान
22 नवंबर 2025 को हुई बोर्ड मीटिंग में कंपनी ने बताया कि वह ₹100 करोड़ के शेयर बायबैक की योजना लेकर आई है।
इस योजना के तहत कंपनी अपने ही शेयर निवेशकों से वापस खरीदेगी, जिससे शेयरहोल्डर्स को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
Buyback के मुख्य पॉइंट्स
- बायबैक साइज ₹100 करोड़
- बायबैक प्राइस ₹380 प्रति शेयर
- रिकॉर्ड डेट 12 दिसंबर 2025
- बायबैक प्राइस प्रीमियम
मौजूदा स्टॉक प्राइस (₹263.25) से लगभग 15% अधिक
इसका मतलब, अगर किसी निवेशक के पास 12 दिसंबर से पहले शेयर होंगे, वही बायबैक ऑफर में हिस्सा ले पाएगा।

शेयर प्राइस पर तत्काल प्रभाव
21 नवंबर (शुक्रवार) को NSE पर VLS Finance का शेयर ₹263.10 पर बंद हुआ।
सिर्फ पिछले सप्ताह में ही स्टॉक में 7.83% की मजबूती देखने को मिली।
बायबैक घोषणा के बाद बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखी, और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।
क्यों घटा कंपनी का तिमाही प्रॉफिट? Q2 FY25 Financial Results
सितंबर 2025 को समाप्त तिमाही कंपनी के लिए वित्तीय रूप से कमजोर रही।
कंपनी के परिणाम इस प्रकार रहे:
Net Profit
- Q2 FY25 ₹7.10 करोड़
- Q2 FY24 ₹51.10 करोड़
- गिरावट 86.11%
Revenue (Sales)
- Q2 FY25 ₹10.46 करोड़
- Q2 FY24 ₹78.80 करोड़ लगभग
- गिरावट 86.75%
कंपनी के प्रॉफिट और रेवन्यू दोनों में बड़ी गिरावट के बावजूद, बायबैक घोषणा ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।
बायबैक से निवेशकों को क्या फायदा होगा?
- बायबैक प्राइस मार्केट प्राइस से काफी ऊंचा है, जिससे निवेशकों को प्रीमियम मिलेगा।
- इससे कंपनी अपनी वैल्यू और वित्तीय मजबूती दिखाना चाहती है।
- बायबैक के बाद बाजार में फ्री-फ्लोट शेयर कम होंगे, जिससे लंबे समय में शेयर की कीमत सपोर्ट पा सकती है।
Final Takeaway
VLS Finance Ltd का ₹100 करोड़ का बायबैक निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
हालांकि कंपनी के वित्तीय परिणाम कमजोर रहे हैं, फिर भी बायबैक प्राइस और भविष्य के संभावित रिटर्न के कारण स्टॉक में अच्छी खासी तेजी देखने को मिली है।
बाजार फिलहाल इस कदम को मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस और निवेशकों के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता के रूप में देख रहा है।
