15 जनवरी को शेयर बाजार बंद Zerodha CEO नितिन कामथ ने फैसले पर उठाए सवाल
आज यानी 15 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद हैं। शुरुआत में इस दिन को केवल Settlement Holiday घोषित किया गया था, जिसका मतलब यह था कि ट्रेडिंग तो होती, लेकिन trades का settlement नहीं होता।
हालांकि, बाद में स्टॉक एक्सचेंज द्वारा नया सर्कुलर जारी किया गया, जिसमें इस दिन को पूरे ट्रेडिंग हॉलिडे के रूप में घोषित कर दिया गया। यानी आज के दिन न तो शेयरों में खरीद-फरोख्त होगी और न ही कोई ट्रेडिंग गतिविधि देखने को मिलेगी।
नितिन कामथ की प्रतिक्रिया “यह फैसला सोचने वाली बात है”
इस फैसले पर Zerodha के CEO और Co-Founder नितिन कामथ ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि किसी स्थानीय चुनाव की वजह से पूरे देश के शेयर बाजार को बंद करना सही नहीं लगता।
नितिन कामथ के अनुसार, आज के समय में शेयर बाजार पूरी तरह global markets से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इस तरह की छुट्टियां बाजार की कार्यप्रणाली और निवेशकों के हितों पर सवाल खड़े करती हैं।
उनका मानना है कि ऐसे फैसलों के दूरगामी असर (Long-term impact) होते हैं, लेकिन इन्हें लागू करने से पहले उन प्रभावों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता।

चार्ली मंगर के विचारों का हवाला
नितिन कामथ ने इस मुद्दे पर बात करते हुए दिग्गज निवेशक Charlie Munger के एक मशहूर विचार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि:
“किसी भी फैसले को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि उससे फायदा किसे हो रहा है।”
चार्ली मंगर की इस सोच का मतलब यह है कि अगर किसी सिस्टम या फैसले से जुड़े लोगों को उसे बदलने में कोई सीधा फायदा नहीं दिखता, तो वह फैसला सालों तक वैसे ही चलता रहता है।
कामथ का इशारा इस ओर था कि शेयर बाजार की छुट्टियों का सिस्टम इसलिए बना हुआ है, क्योंकि जिन लोगों के पास इसे बदलने की ताकत है, उन्हें इसे बदलने से कोई खास लाभ नजर नहीं आता। इसी वजह से इस तरह के फैसलों को शायद ही कभी चुनौती दी जाती है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह मुद्दा?
आज के दौर में, जब retail participation तेजी से बढ़ रहा है और बाजार global स्तर पर operate कर रहे हैं, तब अचानक घोषित की गई ट्रेडिंग छुट्टियां
- Active traders की planning बिगाड़ती हैं
- Global cues का फायदा उठाने से रोकती हैं
- Market efficiency पर सवाल खड़े करती हैं
इसी वजह से यह बहस और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि क्या भविष्य में ऐसे holidays पर दोबारा विचार होना चाहिए?
