FII की बिकवाली के बावजूद बाजार में मजबूती, लेकिन तेजी के लिए उनकी वापसी जरूरी

FII की बिकवाली के बावजूद बाजार में मजबूती, लेकिन तेजी के लिए उनकी वापसी जरूरी

भारतीय शेयर बाजार में एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिल रही है। एफआईआई (Foreign Institutional Investors) की लगातार बिकवाली के बावजूद बाजार अपनी मजबूती बनाए हुए है और कई इंडेक्स ऑल-टाइम हाई के आसपास बने हुए हैं।
हालांकि, इस बुलरन को आगे बढ़ाने के लिए अब जरूरी हो गया है कि एफआईआई भी बाजार में दोबारा भागीदारी करें


छोटे सप्ताह में तेज हुई FII Selling

पिछले सप्ताह छुट्टियों के चलते कारोबार के दिन कम रहे, लेकिन इसके बावजूद एफआईआई की बिकवाली की रफ्तार तेज हो गई
विदेशी निवेशकों ने सिर्फ चार ट्रेडिंग सेशन्स में ₹14,266 करोड़ के शेयर बेच दिए

आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों जैसे Infosys, HCL Tech और TCS के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, लेकिन इसके बावजूद एफआईआई की भारी बिकवाली ने बाजार की तेजी को सीमित कर दिया।


जियो पॉलिटिकल टेंशन और टैरिफ अनिश्चितता बनी वजह

रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा के मुताबिक,
एफआईआई की बिकवाली का मुख्य कारण टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं और बढ़ता जियो-पॉलिटिकल टेंशन है।
इन्हीं कारणों से आईटी कंपनियों के मजबूत तीसरी तिमाही नतीजों से पैदा हुआ पॉजिटिव सेंटिमेंट भी कमजोर पड़ गया।

उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि मौजूदा घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लीवरेज और इन्वेस्टमेंट साइज को संतुलित तरीके से मैनेज करना जरूरी है


तिमाही आधार पर FII Investment Trend

अगर तिमाही आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर और साफ होती है

  • FY25 की तीसरी तिमाही: ₹11,766 करोड़ की बिकवाली
  • इससे पहले FY25 की दूसरी तिमाही: ₹76,619 करोड़ की बिकवाली
  • अप्रैल–जून तिमाही में ₹38,673 करोड़ की खरीदारी हुई थी, लेकिन यह ट्रेंड बाद में पूरी तरह पलट गया
  • जनवरी–मार्च तिमाही: भारी बिकवाली, ₹1,16,574 करोड़ की निकासी

कुल मिलाकर देखा जाए तो एफआईआई की लगातार बिकवाली ने बाजार के समीकरण बिगाड़ दिए हैं


हाई वैल्यूएशन और AI Trade बना बड़ा कारण

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के Chief Investment Strategist वीके विजयकुमार के अनुसार,
पिछले वर्ष एफआईआई के बाजार से बाहर निकलने के प्रमुख कारण रहे:

  • भारतीय शेयर बाजार में हाई वैल्यूएशन
  • AI-Driven Global Trade की ओर शिफ्ट

उन्होंने यह भी बताया कि एफआईआई की लगातार बिकवाली ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी में भी योगदान दिया है।


दिसंबर में भी FII रहे Net Seller

दिसंबर महीने में भी एफआईआई नेट सेलर बने रहे।

  • दिसंबर में बिकवाली ₹22,611 करोड़
  • वर्ष 2025 में अब तक कुल निकासी ₹1,66,286 करोड़

SEBI Registered Research Analyst कलीम खान के मुताबिक,
एफआईआई को अभी भी भारतीय बाजार वैल्यूएशन के लिहाज से महंगे लग रहे हैं और उन्हें अन्य Emerging Markets में बेहतर अवसर नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि उनकी बिकवाली फिलहाल जारी है।


निष्कर्ष बाजार के लिए FII की वापसी अहम

हालांकि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी से बाजार टिका हुआ है, लेकिन लंबी अवधि की स्थिर तेजी के लिए एफआईआई की वापसी बेहद जरूरी होगी
जब तक विदेशी निवेशक दोबारा भरोसा नहीं जताते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है


डिस्क्लेमर
यह कंटेंट केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

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