शेयर बाजार में बढ़ती चिंता, टैक्स राहत की मांग क्यों तेज हुई?

शेयर बाजार में बढ़ती चिंता, टैक्स राहत की मांग क्यों तेज हुई?

भारतीय शेयर बाजार इस समय कई चुनौतियों से जूझ रहा है। विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली, कमजोर रिटर्न और बढ़ता उतार-चढ़ाव निवेशकों की चिंता को और गहरा कर रहा है। ऐसे माहौल में अब इक्विटी निवेश पर टैक्स राहत की मांग तेज होती जा रही है।

बाजार से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार इक्विटी टैक्स, खासतौर पर LTCG टैक्स में राहत देती है, तो इससे बाजार में दोबारा भरोसा लौट सकता है और विदेशी निवेशकों की वापसी संभव हो सकती है।


कैपिटल गेन क्या होता है?

जब कोई निवेशक शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी जैसी किसी संपत्ति को उसकी खरीद कीमत से अधिक दाम पर बेचता है, तो जो मुनाफा होता है उसे कैपिटल गेन कहा जाता है।

कैपिटल गेन दो तरह का होता है—

  • Short Term Capital Gain (STCG)
  • Long Term Capital Gain (LTCG)

STCG और LTCG में क्या अंतर है?

  • अगर लिस्टेड शेयर को एक साल के भीतर बेचा जाता है, तो उस पर होने वाला मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) कहलाता है।
  • अगर शेयर को एक साल से अधिक समय तक होल्ड करने के बाद बेचा जाता है, तो उस पर होने वाला मुनाफा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है।

इसी आधार पर नुकसान (Capital Loss) की कैटेगरी भी तय की जाती है।


1990 के दशक में टैक्स सिस्टम कैसा था?

अगर 1990 के शुरुआती दौर की बात करें, तो उस समय इक्विटी निवेश पर मिलने वाले LTCG पर 20% टैक्स लगता था। लेकिन टैक्स कैलकुलेशन के समय इंडेक्सेशन का फायदा दिया जाता था।

सरल शब्दों में समझें तो, अगर आपने कोई शेयर 10 साल पहले खरीदा था, तो उसकी खरीद कीमत को महंगाई के अनुसार बढ़ाकर टैक्स कैलकुलेशन में माना जाता था। इससे मुनाफा कम दिखता था और टैक्स भी कम देना पड़ता था। यह निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत थी।


STCG पर पहले टैक्स नहीं लगता था

1990 के दशक में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) यानी एक साल से कम समय में शेयर बेचने पर होने वाले मुनाफे पर कोई अलग टैक्स नहीं लगाया जाता था। इससे ट्रेडिंग और निवेश को बढ़ावा मिलता था।


2018 में टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव

शेयर बाजार के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा बदलाव 1 अप्रैल 2018 से लागू हुआ। इसके तहत नियम बना कि—
अगर किसी निवेशक को एक वित्तीय वर्ष में शेयरों से 1 लाख रुपये से अधिक का LTCG होता है, तो उस पर 10% टैक्स देना होगा।

इस बदलाव के बाद लॉन्ग टर्म निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ा और बाजार की चाल पर भी इसका असर देखने को मिला।


क्या सरकार टैक्स में बदलाव करेगी?

अब बड़ा सवाल यही है— क्या सरकार एक बार फिर इक्विटी टैक्स में राहत देगी?
बाजार की मौजूदा हालत को देखते हुए निवेशकों और एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि अगर सरकार LTCG टैक्स में कोई सकारात्मक कदम उठाती है, तो इससे न सिर्फ बाजार को सहारा मिलेगा बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

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