भारतीय शेयर बाजार में FIIs की वापसी से बढ़ी तेजी
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही है। पिछले नौ कारोबारी दिनों में Foreign Institutional Investors (FIIs) ने $2 अरब से अधिक की net buying की है।
इसी खरीदारी का असर Sensex और Nifty पर साफ दिखा है, जहां हाल के सत्रों में लगातार मजबूती देखने को मिली है।
हालांकि market experts का मानना है कि यह तेजी कितनी टिकाऊ होगी, इस पर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।
नौ कारोबारी दिनों में FIIs की मजबूत खरीदारी
28 जनवरी से 6 फरवरी के बीच के नौ कारोबारी सत्रों में
- FIIs ने 6 दिन शुद्ध खरीदारी की
- 3 दिन हल्की बिकवाली देखने को मिली
9 फरवरी के provisional आंकड़ों के मुताबिक, FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में ₹2,223 करोड़ की net buying की।
यह खरीदारी ऐसे समय पर आई है जब हालिया correction के बाद भारतीय बाजारों का valuation अन्य Asian markets की तुलना में ज्यादा attractive हो गया था।

Valuation अब Long-Term Average के करीब
फिलहाल valuation के लिहाज़ से भारतीय बाजार ज्यादा संतुलित नजर आ रहा है
- Sensex forward PE ~20.5x
- Nifty forward PE ~20.1x
ये दोनों अपने 10-साल के औसत के आसपास हैं।
वहीं broader market में
- BSE Midcap-150 Index
- Forward PE ~28x
- Long-term average ~27.3x
यानी midcap space में valuation थोड़ी ऊंची जरूर है, लेकिन extreme zone में नहीं।
Asia के मुकाबले India का Valuation Premium संतुलित
Emmar Capital Partners के CEO Manishi Raichoudhary के अनुसार, Japan को छोड़कर Asia के अन्य markets की तुलना में भारत का forward PE premium अब long-term average के करीब लौट आया है।
पिछले एक दशक में Chinese और Korean markets के कमजोर प्रदर्शन के चलते भारत का valuation premium काफी बढ़ गया था।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक
- India का PE premium 40.1%
- 15-साल का average 39.2%
यानी valuation अब historical comfort zone में है।
P/BV के आधार पर भी India मजबूत स्थिति में
Price-to-Book Value (P/BV) के लिहाज़ से भी भारत की स्थिति संतुलित बनी हुई है।
12-month forward P/BV historical average से थोड़ा ऊपर जरूर है, लेकिन Asia के मुकाबले भारत को मिलने वाला traditional premium अब भी उसी range में बना हुआ है।
क्या आगे भी जारी रह सकती है FIIs की Buying?
Market experts का मानना है कि अगर
- Global trade stability बनी रहती है
- Corporate earnings growth में सुधार होता है
- US dollar कमजोर पड़ता है (rate cuts के चलते)
तो India जैसे emerging markets में FII inflows आगे भी जारी रह सकते हैं।
Trade Deal और Bond Yields से बढ़ा भरोसा
PL Capital के advisory head Vikram Kasat के अनुसार, लगातार दो साल की selling के बाद FIIs का sentiment अब बदलता नजर आ रहा है।
- 2025 में FIIs की net selling: ~$18.88 billion
उनके मुताबिक, हालिया India-US trade agreement, bond yields में stability और बेहतर risk appetite ने विदेशी निवेशकों का confidence बढ़ाया है।
पहले high valuation, कमजोर earnings, मजबूत dollar और trade tensions FIIs पर दबाव बना रहे थे।
Market Correction से बने Attractive Entry Levels
Vikram Kasat का मानना है कि हालिया market correction ने FIIs के लिए बेहतर entry opportunities तैयार की हैं।
इसके साथ ही
- RBI का relatively dovish stance
- GDP growth outlook में सुधार
- Corporate earnings में रिकवरी की उम्मीद
ने investor sentiment को मजबूत किया है।
DIIs की मजबूत भागीदारी से बाजार को सपोर्ट
इस दौरान Domestic Institutional Investors (DIIs) भी पूरी तरह active रहे।
- DIIs की net buying ₹8,973 करोड़ से ज्यादा
FIIs और DIIs दोनों के support से बाजार में broad-based rally देखने को मिली:
- Sensex & Nifty 3%+ की तेजी
- BSE Midcap 150 +5.66%
- BSE Smallcap 250 +6.3%
निष्कर्ष
FIIs की वापसी, balanced valuation और DIIs के मजबूत support से भारतीय शेयर बाजार में momentum बना हुआ है। हालांकि आगे की दिशा global cues, earnings growth और macro stability पर निर्भर करेगी।
