TCS Share Price 5.5 साल के निचले स्तर पर पहुंचा शेयर

TCS Share Price 5.5 साल के निचले स्तर पर पहुंचा शेयर

आईटी सेक्टर में लगातार जारी गिरावट का असर देश की दिग्गज आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) पर भी साफ दिख रहा है।

13 फरवरी को TCS का शेयर गिरकर ₹2,585 के स्तर तक पहुंच गया, जो पिछले साढ़े पांच साल का निचला स्तर है। लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।


AI का बढ़ता असर क्यों घबराए निवेशक?

मार्केट में यह डर बढ़ रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग से पारंपरिक IT सर्विसेज मॉडल पर असर पड़ सकता है।

IT कंपनियों का बड़ा हिस्सा अब तक

  • Application Development
  • Maintenance Contracts
  • Long-Term Outsourcing Deals

जैसे पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर आधारित रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि AI आधारित Automation से इन सेवाओं की मांग और Pricing Power पर दबाव आ सकता है। यही वजह है कि निवेशक IT शेयरों में मुनाफावसूली कर रहे हैं।


Market Cap में भारी गिरावट

शेयर में आई तेज गिरावट का असर कंपनी की कुल मार्केट वैल्यू पर भी पड़ा है।

  • TCS का मार्केट कैप घटकर ₹9.74 लाख करोड़ रह गया है
  • इससे पहले निचला स्तर ₹9.77 लाख करोड़ था, जो अब टूट चुका है

यह कई सालों का निचला स्तर माना जा रहा है।


ऑल-टाइम हाई से 44% गिरावट

अगर पिछले रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो अगस्त 2024 में TCS का शेयर ₹4,592 के ऑल-टाइम हाई पर था।

वर्तमान स्तर की तुलना में

  • शेयर करीब 44% गिर चुका है
  • हाई पर खरीदने वाले निवेशकों को भारी गिरावट का सामना करना पड़ा है

यह गिरावट केवल कंपनी-विशिष्ट नहीं बल्कि पूरे IT सेक्टर में व्यापक कमजोरी को दर्शाती है।


क्या आगे और दबाव संभव है?

TCS जैसी बड़ी IT कंपनी की मजबूती उसके

  • मजबूत क्लाइंट बेस
  • ग्लोबल प्रेजेंस
  • कैश रिजर्व
  • डाइवर्सिफाइड सर्विस पोर्टफोलियो

में छिपी है।

हालांकि शॉर्ट टर्म में AI को लेकर अनिश्चितता और ग्लोबल डिमांड स्लोडाउन शेयर पर दबाव बनाए रख सकते हैं।


निष्कर्ष

IT सेक्टर में जारी बिकवाली के बीच TCS का शेयर साढ़े पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर बाजार में चिंता है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।

लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और सेक्टर आउटलुक को ध्यान से परखने का है, जबकि शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।

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