Ola Electric Mobility के शेयरों में उछाल
Ola Electric Mobility के शेयरों में बुधवार, 18 फरवरी को जोरदार तेजी देखने को मिली।
Bombay High Court की Goa बेंच ने कंपनी के Founder और CEO Bhavish Aggarwal के खिलाफ जारी arrest warrant पर रोक लगा दी, जिसके बाद निवेशकों का भरोसा लौटा और शेयर में तेज खरीदारी देखी गई।
शुरुआती कारोबार में स्टॉक करीब 3.6% उछल गया, जिससे पिछले चार सत्रों से जारी गिरावट पर ब्रेक लगा।
- सुबह करीब 9:25 बजे National Stock Exchange of India पर शेयर लगभग ₹29 के आसपास ट्रेड कर रहा था।
मंगलवार को यह शेयर 2.5% गिरकर ₹28.11 पर बंद हुआ था और इंट्राडे में ₹27.36 का नया 52-वीक लो छू लिया था।
क्या है पूरा मामला?
South Goa की District Consumer Commission ने Bhavish Aggarwal के खिलाफ arrest warrant जारी किया था। आरोप था कि नोटिस मिलने के बावजूद वे आयोग के सामने पेश नहीं हुए।
यह मामला Pritesh Chandrakant Ghadi नामक ग्राहक की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक उनके Ola S1 Pro (2nd Gen) स्कूटर में बार-बार तकनीकी समस्याएं आ रही थीं, जो मरम्मत के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हुईं।

ग्राहक की मांग
- ₹1.47 लाख का रिफंड
- ₹50,000 मानसिक उत्पीड़न का मुआवजा
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि High Court ने warrant पर stay दे दिया है और यह भी माना कि District Consumer Commission ने Consumer Protection Act के तहत अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की थी।
Ola Electric ने मीडिया से अपील की है कि वह कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अटकलों से बचे।
पहले से दबाव में था शेयर
High Court की राहत से पहले भी Ola Electric के शेयर दबाव में थे। हाल के हफ्तों में कई ब्रोकरेज फर्म्स ने स्टॉक की रेटिंग घटाई है।
Citi ने घटाई रेटिंग
Citi ने स्टॉक की रेटिंग ‘Buy’ से घटाकर ‘Sell’ कर दी है।
- टारगेट प्राइस ₹55 से घटाकर ₹27 कर दिया गया
- यानी करीब 51% की कटौती
Brokerage का मानना है कि
- भारत में two-wheeler EV penetration उम्मीद से धीमा है
- पेट्रोल वाहनों पर GST कटौती से EV और ICE वाहनों के बीच कीमत का अंतर कम हुआ है
- Service challenges और rising competition से कंपनी की market share प्रभावित हुई है
- December quarter के नतीजे अनुमान से कमजोर रहे
EV सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
भारत का EV दोपहिया बाजार तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन साथ ही प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। Established auto कंपनियों के आक्रामक प्रवेश और बेहतर service network के कारण नई कंपनियों पर दबाव बढ़ा है।
