US Commerce Department का बड़ा फैसला Indian Solar Industry को 125% Duty का झटका
अमेरिका के US Department of Commerce ने भारत से आयात होने वाले Solar Cell और Solar Panel पर भारी Countervailing Duty (CVD) लगाने का निर्णय लिया है।
यह फैसला केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर उत्पादों पर भी लागू होगा।
अमेरिकी सरकार का तर्क है कि इन देशों की कंपनियों को सरकारी सब्सिडी मिलती है, जिससे अमेरिकी निर्माताओं को नुकसान होता है और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव बढ़ता है।
कितनी लगेगी Duty?
जारी Fact Sheet के अनुसार
- 🇮🇳 भारत पर 125.87% Duty
- 🇮🇩 इंडोनेशिया पर 104.38% Duty
- 🇱🇦 लाओस पर 80.67% Duty
यह कदम अमेरिकी सोलर कंपनियों के एक समूह द्वारा दायर Petition के बाद उठाया गया है।

Import Share और Trade Data
2025 के Trade Data के अनुसार, इन तीन देशों से अमेरिका ने लगभग 4.5 बिलियन डॉलर के सोलर उत्पाद आयात किए।
यह कुल अमेरिकी Solar Import का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।
इसका मतलब है कि यह फैसला वैश्विक सोलर व्यापार पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
दो चरणों में होगा Final Decision
यह अभी प्रारंभिक निर्णय है।
अगले महीने US Commerce Department यह तय करेगा कि क्या इन देशों की कंपनियों ने अपने उत्पाद अमेरिका में Production Cost से कम कीमत पर बेचे।
यदि Dumping के आरोप सही पाए जाते हैं, तो अतिरिक्त Anti-Dumping Duty (ADD) भी लगाई जा सकती है।
कंपनियों पर Specific Impact
कुछ कंपनियों पर अलग-अलग दरें तय की गई हैं
- भारत की Mundra Solar 125.87%
- इंडोनेशिया की PT Blue Sky Solar 143.3%
- PT REC Solar Energy 85.99%
- लाओस की SolarSpace Technology और Vietnam Sunergy Joint Stock Company: 80.67%
SolarSpace के वकील मैथ्यू नाइसली ने इस फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि ये दरें वास्तविक बाजार स्थिति को नहीं दर्शातीं।
American Industry की दलील
यह शिकायत Alliance for American Solar Manufacturing and Trade ने दर्ज कराई थी।
इस समूह में शामिल कंपनियां:
- Hanwha Qcells
- First Solar
- Mission Solar Energy
ग्रुप का कहना है कि सब्सिडी वाले Import से अरबों डॉलर के घरेलू निवेश और नौकरियों पर खतरा है।
ग्रुप के लीड अटॉर्नी टिम ब्राइटबिल के अनुसार, यह फैसला निष्पक्ष Competition बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम है।
Global Impact और Supply Chain
अमेरिका पहले भी सोलर आयात पर सख्ती कर चुका है।
मलेशिया, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया से आने वाले सोलर उत्पादों पर पहले से भारी Tariff लागू हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
Global Solar Supply Chain में बदलाव हो सकता है
भारतीय Exporters को बड़ा झटका लग सकता है
अमेरिकी घरेलू Solar Manufacturing को बढ़ावा मिलेगा
Solar Project Costs में अस्थायी वृद्धि संभव है
Indian Solar Industry पर संभावित असर
- Export Revenue में गिरावट
- US Market में प्रतिस्पर्धा कम होगी
- Alternate Markets की तलाश बढ़ सकती है
- Domestic demand पर अधिक फोकस
हालांकि अंतिम निर्णय अगले महीने आने वाला है। यदि Anti-Dumping Duty भी लागू होती है, तो असर और ज्यादा गहरा हो सकता है।
निष्कर्ष
US Commerce Department का यह फैसला वैश्विक सोलर इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
