भारत–European Union Free Trade Agreement: 5 साल तक MFN Treatment पर सहमति
भारत और European Union के बीच जनवरी 2026 में हुआ Free Trade Agreement (FTA) अब आधिकारिक रूप से लागू हो चुका है। इसे “Mother of All Deal” कहा जा रहा है क्योंकि यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता माना जा रहा है।
समझौते के तहत, लागू होने की तारीख से 5 वर्षों तक दोनों पक्ष एक-दूसरे को Most-Favored-Nation (MFN) Treatment देंगे।
93% भारतीय निर्यात को Duty-Free Entry
इस FTA के प्रमुख बिंदु
- भारत के लगभग 93% निर्यात को EU के 27 देशों में ड्यूटी-फ्री एक्सेस
- EU से भारत आने वाली Luxury Cars और Wine पर टैरिफ में कमी
- भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प
यह समझौता टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, आईटी सर्विसेज और एग्री-प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा दे सकता है।
MFN Treatment क्या है?
Most-Favored-Nation (MFN) Treatment का अर्थ है
भारत या EU अपने किसी अन्य देश को इससे बेहतर टैरिफ शर्तें नहीं दे सकते।
अगर किसी देश को विशेष व्यापारिक लाभ मिलता है, तो वही लाभ सभी MFN पार्टनर्स को भी देना होगा।
MFN में शामिल नहीं
- Taxation Agreements
- Standards या Authorizations की Mutual Recognition
- Dispute Settlement Mechanism
इसके अलावा, frontier (सीमावर्ती) क्षेत्रों में स्थानीय सेवाओं के लिए विशेष रियायतें दी जा सकती हैं।
Fourth Year Review Joint Committee करेगी समीक्षा
समझौते के अनुसार, चौथे वर्ष में एक Joint Committee FTA की समीक्षा करेगी।
मुख्य फोकस रहेगा
- EU में भारतीय छात्रों की एंट्री
- Residence Rights
- Work Rights
- Service Providers की Temporary Movement
रिव्यू के आधार पर तय होगा कि 5 साल बाद MFN Treatment जारी रखा जाए या नहीं।
MFN Extension आगे क्या?
- यदि किसी पक्ष को नकारात्मक प्रभाव दिखता है, तो अतिरिक्त समीक्षा संभव है।
- यदि Joint Committee MFN जारी न रखने का फैसला करती है, तो 5 साल बाद यह बाध्यता समाप्त हो सकती है।
- हालांकि, पहले से दिए गए व्यापारिक लाभ जारी रहेंगे।
भारत–EU FTA का संभावित प्रभाव
Export Boost
Foreign Investment में वृद्धि
Supply Chain Diversification
High-End Imports सस्ते
Trade Volume में तेजी
यह डील भारत और EU के व्यापारिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है और भारत की Global Trade Strategy को मजबूत कर सकती है।
