Middle East तनाव से बाजार में भारी गिरावट, Nifty में 5% साप्ताहिक गिरावट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भारी दबाव बना हुआ है। Iran, Israel और United States के बीच जारी संघर्ष ने ग्लोबल निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर दिया है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
लगातार गिरावट के बावजूद कई निवेशक अपने स्टॉक्स बेचने से बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि मिडिल ईस्ट से किसी सकारात्मक खबर के बाद बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निफ्टी 23200 के नीचे फिसला
शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के दौरान सबसे ज्यादा गिरावट मेटल, ऑटोमोबाइल और फाइनेंशियल सेक्टर में देखी गई। भारी बिकवाली के चलते Nifty 50 23200 के महत्वपूर्ण स्तर से भी नीचे आ गया।
लगातार तीन ट्रेडिंग सेशन में बाजार में गिरावट तेज हुई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

Crude Oil की तेजी से बाजार पर दबाव
मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने के कारण Crude Oil की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे Inflation और Import Bill बढ़ने का खतरा रहता है। यही वजह है कि शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।
एक्सपर्ट की राय Volatility बनी रह सकती है
Sudeep Shah ने SBI Securities की ओर से बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि फिलहाल बाजार मंदी के दबाव में है।
उनके अनुसार United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों के विश्वास को काफी प्रभावित किया है, जिसके कारण बाजार में Volatility जारी रह सकती है।
जून 2022 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में आई तेज गिरावट के कारण Nifty 50 में पूरे सप्ताह के दौरान 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
यह जून 2022 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है। इस दौरान ऑटोमोबाइल और बैंकिंग स्टॉक्स में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।
बाजार को सकारात्मक खबर का इंतजार
फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट से आने वाली खबरों पर टिकी हुई है। अगर तनाव कम होने या युद्धविराम जैसी कोई सकारात्मक खबर आती है, तो बाजार में तेज शॉर्ट कवरिंग और रिकवरी देखने को मिल सकती है।
हालांकि जब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
