Petrol-Diesel Excise Duty Cut सरकार का बड़ा फैसला
भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली Special Additional Excise Duty में बड़ी कटौती कर दी है, जिससे oil marketing companies (OMCs) को बड़ी राहत मिली है।
- Petrol पर duty ₹13 → ₹3 प्रति लीटर
- Diesel पर duty ₹10 → ₹0 प्रति लीटर
यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है।
किन कंपनियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस फैसले से खासतौर पर ये कंपनियां लाभ में रहेंगी
- Indian Oil Corporation Limited
- Bharat Petroleum Corporation Limited
- Hindustan Petroleum Corporation Limited
बढ़ती crude oil कीमतों के कारण इन कंपनियों पर cost pressure बढ़ रहा था, जिसे कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
Middle East Tension का बड़ा असर
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे conflict ने global oil supply को प्रभावित किया है।
- Crude oil prices में तेजी
- Supply chain disruption
- Fuel companies पर financial pressure
सरकार चाहती है कि इसका सीधा असर आम जनता पर न पड़े।

Premium Fuel और Industrial Diesel महंगे
जहां आम पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं, वहीं कुछ categories में बढ़ोतरी की गई है:
- Premium Petrol ₹99.89 → ₹101.89 (Delhi)
- Industrial Diesel ₹87.67 → ₹109.59
इससे कंपनियां अपने losses को balance करने की कोशिश कर रही हैं।
Private Player का कदम
Nyara Energy ने भी हाल ही में कीमतों में बढ़ोतरी की है:
- Petrol ₹5/लीटर तक बढ़ोतरी
- Diesel ₹3/लीटर तक बढ़ोतरी
VAT के कारण कुछ जगहों पर यह बढ़ोतरी ₹5.30/लीटर तक पहुंच सकती है।
Crude Oil Prices में हालिया मूवमेंट
हाल ही में crude oil prices में थोड़ी गिरावट देखने को मिली
- Brent Crude ~$107 प्रति बैरल
- WTI Crude ~$93 प्रति बैरल
यह गिरावट अमेरिका द्वारा Iran पर हमले टालने की घोषणा के बाद आई।
India की Oil Dependency बड़ा जोखिम
- भारत अपनी 88% crude oil जरूरत import करता है
- ज्यादातर supply Strait of Hormuz से आती है
इस route पर geopolitical tension का सीधा असर भारत की energy security पर पड़ता है।
Global Impact Market पर असर
इस ongoing conflict के कारण
- Oil supply में disruption
- Global prices में तेजी
- Stock markets में volatility
इन सभी factors का असर Indian economy और markets पर भी पड़ रहा है।
Conclusion
सरकार का यह excise duty cut एक strategic और timely कदम है, जिससे:
- OMCs को राहत मिलेगी
- Fuel prices स्थिर रखने में मदद मिलेगी
- Inflation को control करने में सहारा मिलेगा
हालांकि, global tension और oil dependency के कारण future में fuel prices को लेकर uncertainty बनी रह सकती है।
