कानपुर में रिटायर्ड बैंकर के साथ क्रिप्टो फ्रॉड ₹2.52 करोड़ का नुकसान
कानपुर के एक रिटायर्ड बैंकर अनिल सिंह चौहान Cryptocurrency Fraud के शिकार बन गए और उन्होंने महज़ एक महीने से भी कम समय में ₹2.52 करोड़ गंवा दिए। इस रकम में उनकी जीवनभर की कमाई, लिया गया लोन और यहां तक कि परिवार के आभूषण भी शामिल थे।
फ्रॉड की शुरुआत कैसे हुई
अनिल सिंह को एक अजनबी से सोशल मीडिया पर मैसेज मिला। बातचीत चैट से वीडियो कॉल तक पहुंची। उन्हें जल्दी अमीर बनने का लालच दिया गया और एक ऐप पर ट्रेडिंग शुरू कराई गई। शुरू में छोटे मुनाफे दिखाकर उनका भरोसा जीता गया, फिर बड़ी रकम निवेश करने को कहा गया। अंत में पूरा पैसा डूब गया और ऐप गायब हो गया।
भारत में Crypto Regulation का अभाव
भारत में क्रिप्टो मार्केट तेजी से बढ़ रही है, लेकिन स्पष्ट नियमों की कमी के कारण निवेशकों के पास ठोस कानूनी सुरक्षा नहीं है। चौहान का मामला अकेला नहीं है—ऐसे कई निवेशक धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।

छोटे शहरों तक Crypto का क्रेज
Crypto अब सिर्फ मेट्रो सिटीज़ तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी Bitcoin, Ethereum, Solana जैसे Tokens में बड़े पैमाने पर कारोबार हो रहा है।
RBI की चेतावनी
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बार-बार चेतावनी देता रहा है कि Crypto:
- मनी लॉन्ड्रिंग
- आतंकवाद को वित्तपोषण
- टैक्स चोरी
के लिए इस्तेमाल हो सकता है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि Crypto न तो करेंसी है, न एसेट, और न ही इसे वैधता मिलनी चाहिए।
भारत की मौजूदा स्थिति
- अनुमानित 2 करोड़ भारतीय Crypto से जुड़े हुए हैं।
- 2022 में सरकार ने 30% टैक्स और 1% TDS लगाया।
- लेकिन निवेशकों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस फ्रेमवर्क मौजूद नहीं है।
- न Exchanges को लाइसेंस चाहिए, न KYC की सख़्ती है।
विदेशों में इसके विपरीत, EU और अमेरिका ने कड़े नियम लागू किए हैं—जैसे Disclosure, Reserve Funds, AML Compliance और Penalties।
समाधान क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को या तो
क्रिप्टो पर सख़्त प्रतिबंध लगाना चाहिए, या
इसे कड़े नियमों के दायरे में लाना चाहिए।
अन्यथा, कम Financial Literacy वाले क्षेत्रों में यह Blockchain के नाम पर संगठित जुआ साबित हो सकता है।
