SEBI बनाम Jane Street फ्रंटरनिंग विवाद की पूरी कहानी
भारतीय बाजार नियामक SEBI और ट्रेडिंग फर्म Jane Street के बीच फ्रंटरनिंग (Front-running) के गंभीर आरोपों को लेकर कानूनी टकराव जारी है। मामला अब Securities Appellate Tribunal (SAT) तक पहुंच चुका है, जहां कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बहस हो रही है।
Interim Order सिर्फ Internal Review पर नहीं
सूत्रों के अनुसार, SEBI का 3 जुलाई 2025 का Interim Order केवल Internal Review पर आधारित नहीं था। यह एक व्यापक जांच (Investigation) का नतीजा था। नियमों के तहत, SEBI ने Jane Street को सभी जरूरी Data मुहैया कराया।
Jane Street की चुनौती और दलीलें
- Jane Street ने SAT में दावा किया कि SEBI ने अपने Surveillance Department (ISD) की उस रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ किया, जिसमें किसी तरह की Manipulation नहीं पाई गई थी।
- यह ISD Report 11 सितंबर 2024 को सौंपी गई थी और NSE की 13 नवंबर 2024 की Analysis पर आधारित थी।
- कंपनी का कहना है कि 61 Documents, जैसे Emails, Original Complaint और “Accepted Delta Exposure” की Definition, उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई।
- Jane Street ने ₹4,843.5 करोड़ Escrow में जमा किए, लेकिन Restrictions नहीं हटाई गईं।

SEBI का रुख क्यों बदला?
- 31 दिसंबर 2024 को SEBI ने Inter-Departmental Team (IDT) बनाई।
- इस टीम ने Cash, Futures और Options Trades का Minute-to-Minute Analysis किया।
- इसी रिपोर्ट के आधार पर 3 जुलाई 2025 को Interim Order जारी हुआ।
- SEBI के अनुसार, ISD रिपोर्ट विभागीय प्रमुख द्वारा Approve नहीं की गई थी, इसलिए जांच का दायरा बढ़ाना पड़ा।
SEBI ने क्या साझा किया?
SEBI ने Jane Street को उपलब्ध कराए
- NSE Report
- ISD Report
- IDT Report (जिस पर Interim Order आधारित था)
SEBI के वकील ने SAT में कहा कि 10 GB Data दिया गया और जिन डॉक्यूमेंट्स पर भरोसा नहीं किया गया, उन्हें साझा करने का सवाल नहीं उठता।
कानूनी मिसालें SEBI के पक्ष में
- Madhyam Agrovate Industries बनाम SEBI SAT ने नोटिस तक जांच की अनुमति दी लेकिन Internal Communications साझा करने से मना किया।
- Kavi Arora बनाम SEBI सुप्रीम कोर्ट ने Forensic Auditor Report के उन हिस्सों को रोकने के SEBI के फैसले को सही ठहराया, जिन पर भरोसा नहीं किया गया था।
SEBI का आरोप
SEBI के Interim Order में आरोप लगाया गया कि Jane Street ने
- Index Options में Manipulation के लिए अपने Financial और Technical Resources का इस्तेमाल किया।
- Expiry Day पर Futures और Cash Market को प्रभावित किया।
- Market की Fairness और Transparency को नुकसान पहुँचाया।
- इसके कारण Retail Investors को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
अगली सुनवाई
SAT ने SEBI से 3 हफ्तों में स्पष्ट करने को कहा है कि कौन से डॉक्यूमेंट्स साझा नहीं किए जा सकते। इसके बाद Jane Street को 3 हफ्तों में Response देना होगा।
अगली सुनवाई: 18 नवंबर 2025।
