Gopal Vittal का बड़ा बयान Digital Era में भरोसा और सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
Bharti Airtel के Managing Director और GSMA Chairman गोपाल विट्टल ने Indian Mobile Congress (IMC) 2025 के दौरान कहा कि
“डिजिटल युग में सबसे बड़ी चुनौती अब भरोसा (Trust) और सुरक्षा (Security) को बनाए रखना है।”
उन्होंने कहा कि भारत ने कनेक्टिविटी की समस्या तो सुलझा ली है, लेकिन अब असली फोकस user safety और institutional collaboration पर होना चाहिए।
कनेक्टिविटी के बाद असली चुनौती — भरोसा और सुरक्षा
विट्टल ने कहा,
“आज कनेक्टिविटी एक बुनियादी अधिकार जैसी बन चुकी है। अगर यह टूट जाए तो बैंकिंग, एविएशन और पेमेंट सिस्टम जैसे सेक्टर बुरी तरह प्रभावित होंगे।”
उन्होंने बताया कि अब सबसे बड़ी समस्या trust, security, और digital inclusion की है।
बढ़ते cyber crimes और online frauds ने लोगों के भरोसे को कमजोर किया है —
उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे एक रिटायर्ड व्यक्ति ने ऑनलाइन ठगी में अपनी सारी जमा पूंजी खो दी।
हर साल $1 ट्रिलियन का नुकसान डिजिटल फ्रॉड से
विट्टल के अनुसार,

“हर साल दुनिया में करीब $1 ट्रिलियन डॉलर डिजिटल फ्रॉड में लुट जाते हैं। यह भरोसे के संकट की सबसे बड़ी निशानी है।”
उन्होंने कहा कि अब डिजिटल ट्रस्ट को पुनर्स्थापित करने के लिए वैश्विक स्तर पर संस्थागत सहयोग (institutional collaboration) जरूरी है।
Airtel का Spam Detection Program
विट्टल ने बताया कि Airtel ने अपने Spam Detection Program के जरिए अब तक —
- 48 अरब (billion) spam messages
- और 3.5 लाख fake links ब्लॉक किए हैं।
उन्होंने कहा,
“कोई कंपनी यह अकेले नहीं कर सकती। इसके लिए पूरे ecosystem को मिलकर काम करना होगा।”
विट्टल ने “Global Fraud Bureau” जैसी संस्था बनाने का सुझाव दिया, जो मिलकर डिजिटल खतरों और फ्रॉड से निपट सके।
Technology और Regulation के बीच बढ़ती दूरी
विट्टल ने कहा,
“टेक्नोलॉजी अब रेगुलेशन से कहीं आगे निकल चुकी है।”
उन्होंने बताया कि मौजूदा नीतियाँ केवल टेलीकॉम सेक्टर पर केंद्रित हैं, जबकि असली खतरा पूरे डिजिटल इकोसिस्टम में है।
वर्तमान स्थिति को उन्होंने “Digital Wild West” बताया — यानी डिजिटल दुनिया के अधिकांश हिस्से अब भी अनियंत्रित हैं।
सरकार का दृष्टिकोण — Innovation और Regulation दोनों जरूरी
Minister of State for Communications & Rural Development, पेम्मासानी चंद्रशेखर ने IMC में कहा —
“हम ऐसी नीतियाँ बना रहे हैं जो user protection सुनिश्चित करें लेकिन innovation को रोकें नहीं।”
उन्होंने बताया कि भारत Semiconductors, Quantum Computing, AI, और 6G जैसी तकनीकों पर मिशन मोड में काम कर रहा है।
सरकार का फोकस “Responsible AI” पर है ताकि एल्गोरिद्म की पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
Regulatory Framework को अपडेट करने की जरूरत
चंद्रशेखर ने कहा,
“भारत के पास पर्याप्त regulatory framework है, लेकिन बदलती technology के साथ इसे लगातार अपडेट करना जरूरी है।”
सरकार अब anonymized data sets के जरिए जिम्मेदार AI research को प्रोत्साहित कर रही है।
उन्होंने माना कि algorithms इतने जटिल हैं कि सरकारों के लिए भी उन्हें पूरी तरह समझना मुश्किल है —
इसलिए public audit, adaptive regulation, और transparency जरूरी है।
Global Perspective और भारत का संकल्प
चंद्रशेखर ने कहा कि USA जैसे देशों में भी algorithmic pricing और opaque AI systems बड़ी चुनौतियां हैं।
भारत का लक्ष्य है —
“ऐसा regulatory environment बनाना जो innovation, trust और transparency — तीनों को साथ लेकर चले।”
Digital Trust की दिशा में भारत की अगली छलांग
विट्टल और चंद्रशेखर दोनों ने सहमति जताई कि भारत अब Digital Inclusion से Digital Trust की ओर बढ़ रहा है।
यह तभी संभव होगा जब industry, innovators, और regulators मिलकर साझा जिम्मेदारी निभाएं और technology के केंद्र में trust को रखें।
