चुनौतियों के साये में पेश होगा यूनियन बजट 2026-27
यूनियन बजट 2026-27 ऐसे समय में पेश होने जा रहा है, जब वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्था कई तरह की चुनौतियों से जूझ रही है। इसके बावजूद, सेक्टर दर सेक्टर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं कि इस बार का बजट राहत और विकास को बढ़ावा देने वाली घोषणाओं के साथ आ सकता है। निवेशकों की नजर खासतौर पर उन नीतिगत फैसलों पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
वैश्विक और घरेलू चुनौतियां बढ़ा रहीं चिंता
वैश्विक स्तर पर जियो-पॉलिटिकल तनाव, ट्रेड वॉर की आशंका, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और धीमी वैश्विक आर्थिक वृद्धि जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। वहीं, घरेलू मोर्चे पर चुनौतियां और भी गहरी नजर आती हैं। शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट, निर्यात में कमजोरी, रुपये का अवमूल्यन और घरेलू खपत में अपेक्षित सुधार न होना सरकार के लिए बड़ा इम्तिहान है। इन सभी पहलुओं को संतुलित तरीके से बजट में शामिल करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

शेयर बाजार की बजट से प्रमुख उम्मीदें
शेयर बाजार में भागीदारी बढ़ने के साथ निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता भी बदल रही है। बाजार को उम्मीद है कि बजट में विकास को समर्थन देने वाले राजकोषीय उपाय, विदेशी निवेश को आकर्षित करने वाली नीतियां और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Capex) को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, कम बाजार उधारी, नियंत्रित राजकोषीय घाटा, सरल कर प्रणाली (इनकम टैक्स, जीएसटी और कॉर्पोरेट टैक्स) और व्यापार करने में आसानी जैसे कदम बाजार के सेंटीमेंट को मजबूत कर सकते हैं। इन्हीं वजहों से बजट 2026-27 को लेकर शेयर बाजार में उत्साह बना हुआ है।
राजकोषीय घाटे पर सरकार की सख्त नजर
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने अपने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए हैं। वित्त वर्ष 2021 में जहां राजकोषीय घाटा जीडीपी के 9.2% के उच्च स्तर पर था, वहीं इसे घटाकर वित्त वर्ष 2025 में 4.8% तक लाया गया। चालू वित्त वर्ष 2026 के लिए सरकार का लक्ष्य इसे और कम करके जीडीपी के लगभग 4.4% तक सीमित रखने का है। यह अनुशासित वित्तीय दृष्टिकोण न केवल डेट मार्केट बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से शेयर बाजार के लिए भी सकारात्मक संकेत देता है।
लार्जकैप कंपनियों और लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए संकेत
लार्जकैप कंपनियों की कैपेक्स योजनाएं लंबे समय के निवेशकों के लिए बेहद अहम होती हैं। यदि सरकार राजकोषीय घाटे और बाजार से उधारी को नियंत्रित रखने में सफल रहती है, तो इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। कम लागत पर फंडिंग उपलब्ध होने से कॉर्पोरेट सेक्टर की बैलेंस शीट मजबूत होगी, जो अंततः इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। यह कदम सरकार की वित्तीय सूझबूझ और विकास-उन्मुख नीति को भी दर्शाता है।
