भारतीय IT सेक्टर, जिसे कभी स्थिर और भरोसेमंद रिटर्न देने वाला ‘डिफेंसिव सेक्टर’ माना जाता था, इस समय तेज दबाव में है। हालिया गिरावट ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस सेक्टर के लिए लंबी अवधि का खतरा बन सकता है, या यह एक नया अवसर साबित होगा।
निफ्टी IT इंडेक्स में तेज गिरावट
पिछले एक महीने में निफ्टी IT इंडेक्स करीब 17% टूट चुका है।
आईटी दिग्गज कंपनियों में भी भारी गिरावट दर्ज हुई है
- TCS – हालिया उच्चतम स्तर से 30% से ज्यादा नीचे
- Wipro – 30% से अधिक गिरावट
- Infosys – डबल डिजिट गिरावट
- LTIMindtree – दो अंकों की कमजोरी
- HCL Technologies – उल्लेखनीय गिरावट
- Tech Mahindra – डबल डिजिट गिरावट
यह गिरावट केवल मार्केट सेंटिमेंट का असर नहीं, बल्कि सेक्टर की बुनियादी चिंताओं से जुड़ी है।
AI को लेकर बढ़ती चिंता
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता जेनरेटिव AI को लेकर है।

AI टूल्स अब
- कोडिंग
- टेस्टिंग
- मेंटेनेंस
- सपोर्ट सिस्टम
जैसे पारंपरिक IT कार्यों को ऑटोमेट करने की क्षमता रखते हैं। यही सेवाएं भारतीय IT कंपनियों की आय का बड़ा हिस्सा रही हैं।
अगर AI इन प्रक्रियाओं को तेज और सस्ता बना देता है, तो “बिल योग्य घंटे” (Billable Hours) मॉडल पर दबाव बढ़ सकता है। भारतीय कंपनियों का पिरामिड स्टाफिंग मॉडल—जहां अधिक जूनियर कर्मचारी ज्यादा काम करते हैं—भी प्रभावित हो सकता है।
कैपिटल एलोकेशन भी एक बड़ी वजह
कमजोरी की वजह सिर्फ AI नहीं है। पिछले पांच वर्षों में कंपनियों ने अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा शेयरहोल्डर्स को लौटा दिया।
FY20 से FY25 के बीच टॉप पांच IT कंपनियों ने लगभग ₹4.8 लाख करोड़
- डिविडेंड
- शेयर बायबैक
के माध्यम से लौटाए।
यह उनकी कुल नेट अर्निंग्स का लगभग 87% था।
- TCS ने लगभग 99% तक मुनाफा वितरित किया।
- 2025 में Infosys ने ₹18,000 करोड़ का बड़ा बायबैक घोषित किया।
ये कदम मजबूत कैश फ्लो का संकेत थे, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे भविष्य की टेक्नोलॉजी में निवेश सीमित हो गया?
R&D खर्च में गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार
- FY21 में भारतीय IT सेक्टर का कॉर्पोरेट R&D में हिस्सा: 4%
- FY24 में घटकर 3% से भी कम
दूसरी ओर, वैश्विक टेक कंपनियां अपनी आय का बड़ा हिस्सा रिसर्च पर खर्च करती हैं:
- Microsoft – 13%–14%
- Alphabet – 15%–16%
- Meta – 20%+
- Amazon – 10%–12%
यह तुलना साफ दिखाती है कि ग्लोबल कंपनियां नई टेक्नोलॉजी और AI प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट पर अधिक आक्रामक हैं।
सर्विस मॉडल बनाम प्रोडक्ट मॉडल
भारतीय IT कंपनियों की ताकत रही है
- बड़े पैमाने पर डिलीवरी
- लागत नियंत्रण
- समय पर प्रोजेक्ट निष्पादन
लेकिन वे मुख्य रूप से सर्विस प्रोवाइडर हैं।
वहीं पश्चिमी टेक कंपनियां
- खुद के प्लेटफॉर्म बनाती हैं
- टेक्नोलॉजी की मालिक होती हैं
- IP (Intellectual Property) तैयार करती हैं
AI के दौर में यह अंतर और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
आगे की दिशा क्या होगी?
AI पूरी तरह खतरा नहीं है।
अगर भारतीय IT कंपनियां
- AI में आक्रामक निवेश करें
- खुद के प्लेटफॉर्म विकसित करें
- सर्विस + AI सॉल्यूशन मॉडल अपनाएं
तो यह सेक्टर नई ग्रोथ स्टोरी भी लिख सकता है।
लेकिन फिलहाल बाजार में अनिश्चितता है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि AI से मार्जिन घटेंगे या नए अवसर बनेंगे।
