Supreme Court of the United States का बड़ा फैसला ट्रंप के टैरिफ रद्द
अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। यह फैसला ग्लोबल ट्रेड और इक्विटी मार्केट्स के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है।
क्या था मामला?
ट्रंप प्रशासन ने “ट्रेड वॉर” रणनीति के तहत कई देशों पर नेशन-स्पेसिफिक रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए थे।
भारत पर भी पहले 50% टैरिफ लगाया गया था, जिसे घटाकर 18% किया गया था।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद:
- भारत से अमेरिका को होने वाले लगभग 55% निर्यात पर 18% रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं लगेगा
- इन पर केवल स्टैंडर्ड MFN (Most Favoured Nation) टैरिफ लागू होगा
- प्रमुख ट्रेड पार्टनर्स को बड़ी राहत

भारत के लिए क्या बदलेगा?
निर्यात को सीधा फायदा
18% अतिरिक्त शुल्क हटने से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टर को फायदा मिल सकता है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर असर
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच एक इंटरिम ट्रेड डील पर संयुक्त बयान जारी हुआ था।
अब नए हालात में भारत डील की शर्तों पर पुनर्विचार कर सकता है।
इक्विटी मार्केट के लिए पॉजिटिव संकेत
- निर्यात आधारित कंपनियों में तेजी की संभावना
- रुपये पर दबाव कम हो सकता है
- निवेशकों का सेंटीमेंट सुधर सकता है
विशेषज्ञ की राय
Global Trade Research Initiative (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार:
भारत को अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर पुनर्विचार करना चाहिए क्योंकि रेसिप्रोकल टैरिफ हटने से 55% निर्यात स्वत 18% शुल्क से मुक्त हो जाएगा।
बाजार के लिए संभावित प्रभाव
| सेक्टर | संभावित असर |
|---|---|
| IT | निर्यात मार्जिन में सुधार |
| फार्मा | US मार्केट में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त |
| टेक्सटाइल | प्राइसिंग एडवांटेज |
| ऑटो कंपोनेंट | एक्सपोर्ट वॉल्यूम में वृद्धि |
निष्कर्ष
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ट्रंप की ट्रेड वॉर रणनीति के लिए बड़ा झटका है, लेकिन भारत के लिए यह एक अवसर साबित हो सकता है।
यदि 18% रेसिप्रोकल टैरिफ पूरी तरह समाप्त रहता है, तो भारत के निर्यात और इक्विटी मार्केट्स को मध्यम अवधि में सकारात्मक बढ़त मिल सकती है।
