Middle East Tension और Indian Market पर असर
Middle East में बढ़ते geopolitical tension का असर अब भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।
Kotak Mahindra Asset Management Company के Managing Director Nilesh Shah का कहना है कि भारत सीधे Iran से जुड़े conflict का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसके आर्थिक झटके अब महसूस होने लगे हैं।
उनके मुताबिक बाजार ने शुरुआती झटके को काफी हद तक झेल लिया है, लेकिन global uncertainty अभी भी बनी हुई है।
Crude Oil भारत के लिए सबसे बड़ा Risk
Nilesh Shah के अनुसार मौजूदा हालात में भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम crude oil price है।
उन्होंने इसे समझाते हुए कहा कि तेल की ऊंची कीमतें भारत की आर्थिक कुंडली में “राहु काल” की तरह काम करती हैं, यानी यह ऐसा समय है जो economic growth के लिए चुनौती बन सकता है।

Oil Price बढ़ने का Economy पर असर
अगर crude oil की कीमतों में लगभग 10% की बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर कई आर्थिक संकेतकों पर पड़ सकता है:
- Retail Inflation लगभग 20–30 basis points तक बढ़ सकती है
- GDP Growth लगभग 10–20 basis points तक कम हो सकती है
- Current Account Deficit (CAD) लगभग 10–15 basis points बढ़ सकता है
अगर secondary effects को भी शामिल किया जाए तो कुल आर्थिक असर और ज्यादा बढ़ सकता है।
Overseas Indians और Forex Inflow भी अहम
Middle East tension का असर सिर्फ energy supply तक सीमित नहीं है।
Nilesh Shah के अनुसार Gulf देशों में 90 लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं।
इन प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली remittances भारत के foreign exchange inflow का बड़ा हिस्सा होती हैं।
अगर Middle East में तनाव बढ़ता है तो इसका असर इन क्षेत्रों पर पड़ सकता है:
- Remittances
- Indian Rupee
- Bond Yield
- Equity Market Sentiment
Long Term Investors के लिए Opportunity
बाजार में बढ़ती volatility के बावजूद उनका मानना है कि यह समय long-term investors के लिए अवसर भी पैदा कर सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि
- गिरावट में quality stocks की bottom-up selection करनी चाहिए
- portfolio में diversification बनाए रखना चाहिए
यह रणनीति volatile market में जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।
Valuation अभी Bubble Zone में नहीं
valuation के नजरिए से देखें तो:
- Large-cap stocks उचित स्तर पर
- Mid-cap stocks संतुलित valuation
- Small-cap stocks अभी भी थोड़े महंगे
उनके मुताबिक अगर कोई निवेशक 30% से ज्यादा return की उम्मीद करता है तो बाजार महंगा लग सकता है।
लेकिन medium term में mid-single digit positive real returns के लिए मौजूदा स्तर एक उचित entry point माना जा सकता है।
Oil & Gas Exploration पर बढ़ सकता है Focus
Middle East में बढ़ते तनाव और supply disruption को देखते हुए संभावना है कि सरकार domestic oil and gas exploration पर अधिक ध्यान दे सकती है।
पिछले दो दशकों में भारत ने कई क्षेत्रों के जरिए तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश की है:
- Services sector
- Renewable energy
- Nuclear power
अब स्थानीय hydrocarbon exploration और agriculture waste से energy production जैसे विकल्पों पर भी फोकस बढ़ सकता है।
Q4 Earnings पर असर कैसा रहेगा
अगर FY26 की चौथी तिमाही (Q4) की बात करें तो बढ़ती तेल कीमतों का असर कुछ सेक्टरों पर पड़ सकता है।
संभावित रूप से प्रभावित सेक्टर:
- Oil & Gas
- Petrochemicals
- Plastics
- Fertilizers
इन सेक्टरों में input cost बढ़ने और margin pressure का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि अगर तेल की तेजी ज्यादा समय तक नहीं रहती तो इसका असर सीमित रह सकता है।
Banking और Financial Stocks में Value
हालिया market correction के बाद banking और financial sector के stocks अधिक आकर्षक दिखाई देने लगे हैं।
Nilesh Shah के अनुसार
- Deposit repricing से FY27 में NIM expansion को समर्थन मिल सकता है
- फिलहाल asset quality को लेकर बड़ी चिंता नहीं है
इस वजह से यह सेक्टर volatile market में भी अपेक्षाकृत मजबूत दिख सकता है।
Travel और Airline Stocks पर असर
बढ़ते oil price और संभावित flight disruptions के कारण travel, tourism और airline sector पर दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि long-term नजरिए से bottom-up stock selection के जरिए यहां भी निवेश के अवसर मिल सकते हैं।
उनका मानना है कि मौजूदा समय में portfolio diversification रणनीति अपनाना ज्यादा बेहतर रहेगा।
