भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा पर सवाल, Arvind Subramanian ने जताई चिंता

भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा पर सवाल, Arvind Subramanian ने जताई चिंता

भारत के पूर्व Chief Economic Adviser (CEA) अरविंद सुब्रमणियन का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को कई बाहरी और आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके अनुसार अमेरिकी टैरिफ, चीन से बढ़ते निर्यात और सरकारी बजट की सीमाएं देश की आर्थिक ग्रोथ को दबाव में डाल सकती हैं।


Economic Data से स्पष्ट तस्वीर मिलना मुश्किल

सुब्रमणियन ने कहा कि मौजूदा आर्थिक आंकड़ों को देखकर यह तय करना कठिन हो गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है या नहीं।
उन्होंने High-Frequency Indicators और Nominal Growth की धीमी रफ्तार का जिक्र करते हुए कहा कि ये संकेत अर्थव्यवस्था की वास्तविक गति और दिशा को लेकर सतर्क रहने का संकेत देते हैं।

उनका मानना है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अगर अगले साल भी भारत की GDP Growth Rate इस साल के आसपास बनी रहती है, तो इसे भी एक अच्छा प्रदर्शन माना जाना चाहिए।


US Tariffs और Trade Policy बना बड़ा जोखिम

पूर्व CEA ने अमेरिका की बिजनेस और ट्रेड पॉलिसी से जुड़े जोखिमों पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ भविष्य के आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर रहे हैं।

उनके अनुसार

  • भारत-अमेरिका Trade Agreement की संभावना फिलहाल कम दिख रही है
  • आने वाले समय में टैरिफ दरें और बढ़ सकती हैं
  • इससे भारतीय निर्यात और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव पड़ सकता है

China Exports और ‘Chinese Mercantilism’ से बढ़ी चिंता

अरविंद सुब्रमणियन ने चीन की व्यापार रणनीति को भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने इसे “Chinese Mercantilism” करार दिया।

उनका कहना है कि

  • चीन तेजी से अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ा रहा है
  • यह माल बड़ी मात्रा में विकासशील देशों की ओर भेजा जा रहा है
  • इससे भारत जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और प्राइस प्रेशर बन सकता है

Macroeconomic स्थिति ठीक, लेकिन Fiscal Position कमजोर

सुब्रमणियन के मुताबिक भारत की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति फिलहाल स्थिर नजर आती है, लेकिन राजकोषीय (Fiscal) स्थिति उतनी मजबूत नहीं है।

इसका एक बड़ा कारण

  • हाल ही में की गई GST Rates में कटौती,
  • जिससे सरकार के रेवेन्यू पर दबाव पड़ा है

Currency Policy में Flexibility की जरूरत

पूर्व CEA ने सुझाव दिया कि भारत की Currency Policy में ज्यादा Flexibility होनी चाहिए।
इससे:

  • भारतीय Exporters बाहरी झटकों से बेहतर तरीके से निपट सकेंगे
  • Global Economic Uncertainty के समय प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है

निष्कर्ष (Conclusion)

अरविंद सुब्रमणियन की राय साफ संकेत देती है कि भले ही भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर दिख रही हो, लेकिन वैश्विक जोखिम, ट्रेड टेंशन और फिस्कल चुनौतियां आने वाले समय में ग्रोथ को सीमित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में स्थिर विकास दर बनाए रखना भी एक उपलब्धि मानी जा सकती है।


Disclaimer

यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से लिखा गया है। आर्थिक नीतियों या निवेश से जुड़े निर्णय विशेषज्ञ सलाह के आधार पर ही लें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top