Bank of Baroda Bond Issue 7 साल बाद विदेशी बाजार में लौटा बैंक, जुटाए $700 मिलियन

Bank of Baroda Bond Issue 7 साल बाद विदेशी बाजार में लौटा बैंक, जुटाए $700 मिलियन

सरकारी स्वामित्व वाले Bank of Baroda ने करीब सात साल बाद अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार में वापसी की है। बैंक ने दो अलग-अलग बॉन्ड जारी कर कुल 700 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारतीय बैंक विदेशी मुद्रा में फंडिंग जुटाने के साथ-साथ अपने funding sources को भी diversify कर रहे हैं।

Bank of Baroda ने तीन साल और पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी किए। खास बात यह रही कि दोनों बॉन्ड को निवेशकों की मजबूत मांग मिली और कुल order book करीब 2.7 अरब डॉलर तक पहुंच गई।

Bank of Baroda ने कैसे जुटाए $700 मिलियन?

Bank of Baroda ने तीन साल और पांच साल के दो बॉन्ड के जरिए रकम जुटाई।

  • 3 साल का बॉन्ड $400 मिलियन
  • 5 साल का बॉन्ड $300 मिलियन
  • कुल फंड जुटाया $700 मिलियन

तीन साल के बॉन्ड की कीमत तीन साल के अमेरिकी Treasury Bond से 90 basis points अधिक रही। शुरुआती guidance 120 basis points के आसपास थी।

वहीं, पांच साल के बॉन्ड का spread पांच साल के अमेरिकी Treasury Bond से 100 basis points रहा। इसके लिए शुरुआती guidance करीब 130 basis points थी।

यहां 1 basis point यानी 0.01 प्रतिशत अंक होता है।

निवेशकों से मिली मजबूत मांग

Bank of Baroda के दोनों बॉन्ड के लिए करीब 2.7 अरब डॉलर की कुल order book मिली। यानी बैंक ने जितना पैसा जुटाने की योजना बनाई थी, उससे कई गुना ज्यादा निवेशकों ने बॉन्ड खरीदने में रुचि दिखाई।

इस मांग में asset managers और pension funds जैसे institutional investors शामिल रहे।

मजबूत demand का एक संकेत यह भी है कि बैंक ने शुरुआती guidance की तुलना में कम spread पर फंड जुटाया। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच इस बॉन्ड इश्यू को अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

बॉन्ड का Coupon कितना रहा?

तीन साल के बॉन्ड की कीमत 5.11% रही, जबकि पांच साल के बॉन्ड का coupon करीब 5.32% तय किया गया।

कम spread पर फंड जुटाने में सफलता बैंक के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है, क्योंकि इससे पता चलता है कि निवेशकों की मांग मजबूत रही।

हालांकि, किसी बॉन्ड इश्यू की लागत को समझने के लिए केवल coupon rate देखना पर्याप्त नहीं होता। इसमें benchmark Treasury yield, credit spread और बाजार की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।

SBI ने भी जुटाए $500 मिलियन

Bank of Baroda की विदेशी बॉन्ड बाजार में वापसी ऐसे समय में हुई है जब एक अन्य बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से फंड जुटाया है।

SBI ने इससे एक दिन पहले पांच साल की अवधि के बॉन्ड के जरिए 500 मिलियन डॉलर जुटाए थे। SBI के बॉन्ड का coupon 5.25% रहा और यह पांच साल के US Treasury Bond से 88 basis points के spread पर जारी किया गया।

इससे संकेत मिलता है कि बड़े भारतीय PSU Banks विदेशी बाजारों से डॉलर में फंड जुटाने के विकल्प का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बैंक विदेशी बॉन्ड क्यों जारी करते हैं?

विदेशी बॉन्ड जारी करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा में फंडिंग जुटाना है।

अगर किसी बैंक को डॉलर में फंड की जरूरत है, तो वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में dollar-denominated bonds जारी कर सकता है। इससे बैंक को विदेशी मुद्रा में पूंजी मिलती है, जिसका इस्तेमाल नियामकीय नियमों और बैंक की जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है।

Funding Sources को Diversify करना

दूसरा महत्वपूर्ण कारण funding sources में diversification है।

अगर कोई बैंक केवल घरेलू deposits और domestic bond market पर निर्भर रहता है, तो उसके funding options सीमित हो सकते हैं। International bond market तक पहुंच मिलने से बैंक के पास पूंजी जुटाने का एक अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध हो जाता है।

इससे बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बैंक अलग-अलग funding sources का इस्तेमाल कर सकता है।

RBI की Special Swap Window से जुड़ा है फंडिंग प्लान

Bank of Baroda ने यह फंडिंग RBI की विशेष swap window का लाभ उठाने के लिए की है। जुटाई गई रकम का इस्तेमाल बैंक के धनी विदेशी ग्राहकों को lending के लिए किया जाएगा। ये ग्राहक इस राशि का इस्तेमाल विशेष FCNR(B) deposits से जुड़ी व्यवस्था में कर सकते हैं।

इस व्यवस्था में RBI hedging cost को पूरी तरह वहन करता है।

सरल शब्दों में, hedging का उद्देश्य विदेशी मुद्रा की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिम को कम करना है। इससे डॉलर में जुटाए गए फंड को इस्तेमाल करने में बैंकों के लिए currency risk management आसान हो सकता है।

Bank of Baroda ने आखिरी बार कब जारी किया था International Bond?

Bank of Baroda ने इससे पहले अप्रैल 2019 में अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड जारी किया था।

उस समय बैंक ने पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड के जरिए 300 मिलियन डॉलर जुटाए थे। उस इश्यू की दर करीब 3.87% थी।

अब करीब सात साल बाद बैंक ने दो बॉन्ड के जरिए कुल 700 मिलियन डॉलर जुटाए हैं।

विवरण20192026
कुल रकम$300 मिलियन$700 मिलियन
अवधि5 साल3 साल और 5 साल
दर/Coupon3.87%5.11% और 5.32%
अंतरराष्ट्रीय बाजार में वापसीकरीब 7 साल बाद

PSU Banks के लिए क्या है इसका मतलब?

Bank of Baroda और SBI की हालिया international bond issuances से यह संकेत मिलता है कि बड़े PSU Banks विदेशी बाजारों से dollar funding जुटाने के विकल्प का इस्तेमाल कर रहे हैं।

Bank of Baroda को $700 मिलियन के इश्यू के लिए करीब $2.7 अरब की order book मिली। वहीं SBI ने एक दिन पहले $500 मिलियन जुटाए।

मजबूत investor demand से भारतीय सरकारी बैंकों को international capital markets में अपनी मौजूदगी बनाए रखने का अवसर मिलता है। साथ ही, विदेशी मुद्रा में funding उपलब्ध होने से उन banking activities को support मिल सकता है जिनमें dollar funding की जरूरत होती है।

निष्कर्ष

करीब सात साल बाद Bank of Baroda की international bond market में वापसी भारतीय PSU banking sector के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। बैंक ने तीन साल और पांच साल के बॉन्ड के जरिए कुल $700 मिलियन जुटाए और इसे करीब $2.7 अरब की मजबूत order book मिली।

SBI द्वारा इससे पहले $500 मिलियन जुटाए जाने के साथ देखें तो बड़े सरकारी बैंकों की international funding में सक्रियता बढ़ती दिखाई देती है।

Bank of Baroda के मामले में इस फंडिंग का इस्तेमाल विदेशी ग्राहकों को lending और FCNR(B) से जुड़ी व्यवस्था के तहत किया जाना है। हालांकि, इस तरह के बॉन्ड इश्यू का बैंक की profitability पर वास्तविक प्रभाव आगे funding cost, asset deployment और currency risk management पर निर्भर करेगा।

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