भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली Midcap–Smallcap शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
भारतीय शेयर बाजार में जारी तेज बिकवाली का सबसे गहरा असर उन सेगमेंट्स पर देखने को मिल रहा है, जहां Retail Investors की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। Largecap शेयरों की तुलना में Midcap, Smallcap और SME Stocks में कहीं ज्यादा तेज और गहरी गिरावट दर्ज की गई है।
साल की शुरुआत से अब तक
- BSE Midcap Index करीब 5.8% टूट चुका है
- BSE Smallcap Index में लगभग 8.1% की गिरावट आई है
- SME IPO Index में 10% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है
यह गिरावट बीते करीब 12 महीनों की सबसे तेज Monthly Fall मानी जा रही है। इसके मुकाबले Sensex और Nifty जैसे Largecap Indices में गिरावट सीमित रही है और ये दोनों लगभग 3.5% नीचे ट्रेड कर रहे हैं।
दो साल की सुस्ती के बाद टूटा Investors का भरोसा
Market Experts का मानना है कि यह गिरावट अचानक नहीं आई है। पिछले दो वर्षों में Mutual Funds का बड़ा निवेश Midcap और Smallcap Stocks में गया था, जो Largecap Funds की तुलना में कहीं अधिक था।
हालांकि, भारी निवेश के बावजूद इन शेयरों से Earnings Growth उतनी मजबूत नहीं रही, जितनी Valuation बढ़ी। जैसे ही Global Uncertainty बढ़ी और Macroeconomic संकेत कमजोर हुए, सबसे पहले दबाव इन्हीं High-Valuation Stocks पर आया।

Valuation Correction ने बढ़ाई Selling Pressure
Market Analyst दीपक जसानी के अनुसार, मौजूदा गिरावट सिर्फ Share Prices तक सीमित नहीं है, बल्कि Earnings Growth में भी कमजोरी देखने को मिल रही है।
उनका कहना है कि जब तक
- Largecap
- Midcap
- Smallcap
कंपनियों की कमाई को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक Strong Recovery की उम्मीद कम रहेगी। सीमित EPS Growth के कारण Valuation की दोबारा Re-rating भी फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है।
Investor Rotation से बदला Market का रुख
Market Participants के मुताबिक गिरावट को तेज करने में Investor Rotation की बड़ी भूमिका रही है। जैसे ही Largecap Quality Stocks बेहतर Valuation पर उपलब्ध होने लगे, Investors ने
SME, Smallcap और Midcap Stocks से पैसा निकालकर Largecap में शिफ्ट करना शुरू कर दिया।
खासतौर पर SME Shares, जो पहले High Growth Expectations के चलते Premium Valuation पर ट्रेड कर रहे थे, वहां अचानक तेज Profit Booking देखने को मिली।
Mutual Funds की बिकवाली से बढ़ा दबाव
Asit C Mehta Investment Intermediaries के Research Head सिद्धार्थ भामरे के अनुसार Midcap और Largecap के बीच Valuation Gap काफी बढ़ गया था, जो अब Normal हो रहा है।
कमजोर Returns के कारण Redemption Pressure बढ़ा है, क्योंकि इन Segments में निवेश का बड़ा हिस्सा Mutual Funds के जरिए आया था।
Domestic Mutual Funds की Selling ने Midcap और Smallcap Shares की Underperformance को और गहरा कर दिया है, और यह Trend कुछ समय तक जारी रह सकता है।
SIP Investors के लिए चुनौतीपूर्ण दौर
भामरे के अनुसार
- Nifty SIP Returns ने पिछले दो वर्षों में कोई खास प्रदर्शन नहीं किया
- तीन साल का Total Return भी करीब 10% के आसपास रहा
- वहीं Smallcap Investments अब भी Negative Zone में हैं
ऐसे में जिन Investors ने लगातार Midcap या Smallcap Funds में SIP जारी रखी है, उन्हें सीमित या लगभग शून्य Capital Appreciation मिला है। इससे Asset Allocation को लेकर दोबारा सोचने की जरूरत महसूस हो रही है।
Equity से हटकर दूसरे Investment Options की ओर झुकाव
कमजोर Equity Returns के चलते निवेश का एक हिस्सा अब
- Gold
- चुनिंदा Real Estate
- और Foreign Investments
की ओर शिफ्ट होता दिख रहा है। इन विकल्पों ने इसी अवधि में भारतीय शेयर बाजार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
Correction के बाद भी महंगे हैं कई शेयर
Market Experts का मानना है कि हालिया Correction के बावजूद कई Midcap और Smallcap Stocks अब भी पूरी तरह Cheap नहीं हुए हैं।
तेजी से गिरते बाजार में जल्दबाजी में Buying करना जोखिम भरा हो सकता है। Sustainable Investment के लिए Volatility का कम होना जरूरी माना जा रहा है।
Correction में भी छुपे हैं मौके
कुछ Analysts इस Correction को Opportunity के तौर पर भी देख रहे हैं। Market Expert अंबरीश बलिगा के अनुसार मौजूदा हालात को पूरी तरह Bear Market नहीं कहा जा सकता।
उनका कहना है कि बाजार थोड़ा और फिसल सकता है, लेकिन Exact Bottom पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। Broader Market फिलहाल Oversold नजर आ रहा है, इसलिए जिन Retail Investors के पास Cash है, वे Phase-wise Buying पर विचार कर सकते हैं।
आगे Recovery की उम्मीद कहां से?
बलिगा के मुताबिक
- Mutual Funds के पास Cash उपलब्ध है और वे Selective Buying कर रहे हैं
- FII अभी भी Selling Mode में हैं
हालांकि Smallcap में FIIs की हिस्सेदारी सीमित होती है, इसलिए वहां उनका असर अपेक्षाकृत कम रहता है। Experts का मानना है कि Market को असली Support तब मिलेगा जब
HNIs और PMS Investors सक्रिय रूप से Buying शुरू करेंगे।
जैसे ही बाजार में लगातार Accumulation दिखने लगेगा, Recovery की मजबूत नींव तैयार हो सकती है।
