भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह Gift Nifty में हल्की मजबूती देखने को मिली, लेकिन निवेशकों और बिजनेस समुदाय की नजरों में सबसे बड़ा अपडेट CBDT के हालिया फैसले का रहा। Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने देशभर के टैक्सपेयर्स के लिए Income Tax Return (ITR) और Audit Report दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर बड़ा राहत कदम उठाया है।
Deadline Extension अब नई तिथियाँ तय
CBDT ने 29 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में बताया कि Assessment Year 2025-26 के लिए ITR और Audit Report Filing की महत्वपूर्ण तिथियों में बदलाव किया गया है:
| दस्तावेज़ | पुरानी अंतिम तिथि | नई अंतिम तिथि |
|---|---|---|
| Audit Report Filing | 31 अक्टूबर 2025 | 10 नवंबर 2025 |
| ITR Filing (Audited Cases) | 31 अक्टूबर 2025 | 10 दिसंबर 2025 |
यह निर्णय विशेष रूप से उन Taxpayers के लिए राहत लेकर आया है जिनके Accounts का Audit अनिवार्य होता है, जैसे:
- कंपनियाँ (Companies)
- प्रोपाइटरशिप फर्म्स
- पार्टनरशिप फर्म्स के Working Partners

Income-tax Act के तहत संशोधन
यह बदलाव Income-tax Act, 1961 की Section 139(1) के अंतर्गत किया गया है।
CBDT ने स्पष्ट किया कि Return Filing और Tax Audit दोनों की समयसीमा बढ़ाने का उद्देश्य Compliance की प्रक्रिया को आसान बनाना और अनावश्यक दवाब को कम करना है।
High Courts के हस्तक्षेप के बाद निर्णय
यह निर्णय कई हाई कोर्ट्स के आदेशों के बाद लिया गया:
- Himachal Pradesh High Court
- Punjab & Haryana High Court
- इससे पहले Gujarat High Court ने भी ऐसे मामलों में राहत दी थी।
इन आदेशों में ऑडिट और टैक्स रिपोर्टिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिक समय प्रदान करने की सिफारिश की गई थी।
Professional Associations के अनुरोध पर विचार
CBDT को कई CA Associations और Tax Consultants की ओर से अनुरोध प्राप्त हुए थे, जिनमें बताया गया कि Audit Season में बढ़ता कार्यभार, तकनीकी जटिलताएँ और दस्तावेजी प्रक्रियाएँ समय लेने वाली हैं।
इन हालात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने टैक्स प्रोफेशनल्स और बिजनेस संस्थानों को अतिरिक्त समय देने का फैसला किया।
पहले भी दी गई थी समय सीमा में छूट
इससे पहले 25 सितंबर 2025 को CBDT ने Tax Audit Report (TAR) की अंतिम तिथि 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2025 की थी।
अब दूसरी बार समयसीमा बढ़ने से व्यवसायियों को Audit और ITR Filing को सिस्टमेटिक और एरर-फ्री तरीके से पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
सार
CBDT का यह कदम
- टैक्स कंप्लायंस प्रक्रिया को सरल करेगा
- टैक्स प्रोफेशनल्स पर दबाव कम करेगा
- व्यवसायियों को दस्तावेजों की तैयारी और समीक्षा के लिए अतिरिक्त समय देगा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला फाइनेंशियल सिस्टम में स्थिरता और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक कदम है।
