DII ने FY26 में लगाए ₹8.09 लाख करोड़, FII की ₹1.81 लाख करोड़ बिकवाली को दिया सहारा
वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय शेयर बाजार को घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII से मजबूत सपोर्ट मिला। आंकड़ों के अनुसार, DII ने इस दौरान रिकॉर्ड ₹8.09 लाख करोड़ का निवेश किया, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने ₹1.81 लाख करोड़ की बिकवाली की।
इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों की लगातार Selling के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभाई। यह बदलाव भारतीय शेयर बाजार में घरेलू पूंजी की बढ़ती ताकत को भी दिखाता है।
DII ने FII की बिकवाली को किया काफी हद तक संतुलित
AMFI-Crisil Factbook 2026 में घरेलू संस्थागत निवेशकों के प्रदर्शन को उल्लेखनीय बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, DII Investment में Mutual Funds की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही।
FY26 में जहां FII ने ₹1.81 लाख करोड़ की Net Selling की, वहीं DII ने इसके मुकाबले कई गुना अधिक निवेश किया। इससे विदेशी पूंजी के बाहर जाने के बावजूद बाजार में घरेलू खरीदारी का मजबूत आधार बना रहा।
इसका एक बड़ा असर यह है कि भारतीय शेयर बाजार अब केवल विदेशी निवेशकों के Flow पर पहले की तरह निर्भर नहीं रह गया है।
भारतीय निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी बदल रही है Market Structure
भारतीय शेयरों के Ownership Pattern में भी पिछले कुछ वर्षों में बदलाव आया है।
मार्च 2021 में Mutual Funds के पास Free-Float Market Capitalisation का हिस्सा करीब 15% था। मार्च 2026 तक यह बढ़कर लगभग 23% हो गया।
इसके विपरीत, इसी अवधि में FII की हिस्सेदारी में गिरावट देखने को मिली।
इसका मतलब है कि भारतीय Mutual Funds अब घरेलू Equity Market में पहले की तुलना में कहीं बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
SIP बना Domestic Investment का मजबूत आधार
घरेलू निवेश को मजबूती देने में Systematic Investment Plan यानी SIP की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
SIP के जरिए निवेशक आमतौर पर हर महीने एक तय रकम Mutual Fund में निवेश करते हैं। इससे बाजार में नियमित रूप से पैसा आता रहता है और निवेशकों को Short-Term Market Volatility के बावजूद लंबे समय तक निवेश बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
AMFI-Crisil Factbook के अनुसार, FY26 में SIP के जरिए हर महीने औसतन करीब ₹32,087 करोड़ का निवेश हुआ।
SIP के माध्यम से Managed Assets भी बढ़कर ₹14.83 लाख करोड़ से अधिक हो गए, जो Mutual Fund Industry के कुल Assets Under Management का करीब पांचवां हिस्सा था।
Market गिरने पर भी SIP Investment जारी रहा
घरेलू निवेश की मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP निवेश में बड़ी रुकावट नहीं आई।
इससे संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में निवेशक Short-Term Market Movements के बजाय Long-Term Investment Approach पर ध्यान दे रहे हैं।
हालांकि, SIP Flow का जारी रहना यह गारंटी नहीं देता कि बाजार हमेशा ऊपर जाएगा। इसका मतलब केवल इतना है कि घरेलू निवेश का एक नियमित स्रोत बाजार में बना हुआ है।
Mutual Fund Investors की संख्या में तेज बढ़ोतरी
Domestic Investment Base बढ़ने के पीछे Mutual Fund Investors की संख्या में हुई वृद्धि भी महत्वपूर्ण है।
मार्च 2025 में Mutual Fund के नए निवेशकों की संख्या करीब 5.36 करोड़ थी। मार्च 2026 तक यह बढ़कर 6.14 करोड़ हो गई।
यानी करीब एक साल में लगभग 78 लाख नए निवेशक Mutual Fund से जुड़े।
इसी अवधि में Mutual Fund Industry का AUM भी ₹65.74 लाख करोड़ से बढ़कर ₹73.73 लाख करोड़ हो गया।
यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में Mutual Fund और Market-Linked Investment Products की पहुंच लगातार बढ़ रही है।
अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है Mutual Fund Investment
भारत में Mutual Fund Investment का विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है।
Tier-2 और Tier-3 शहरों से भी निवेश की भागीदारी बढ़ रही है। इससे घरेलू बचत का एक बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे Financial Assets की ओर जा रहा है।
इस व्यापक भागीदारी से घरेलू Institutional Investment Base को मजबूत करने में मदद मिल रही है।
FII Selling के समय DII क्यों महत्वपूर्ण हैं?
FII आमतौर पर Global Interest Rates, Currency Movements, Geopolitical Events और Emerging Market Conditions जैसे कई Factors से प्रभावित होते हैं। इसलिए विदेशी निवेश का Flow काफी तेजी से बदल सकता है।
इसके मुकाबले Mutual Fund और SIP के जरिए आने वाला Domestic Investment अपेक्षाकृत अधिक नियमित हो सकता है।
यही कारण है कि जब FII बड़े स्तर पर Selling करते हैं, तब DII की Buying बाजार में Liquidity और Demand को सपोर्ट दे सकती है।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि DII हमेशा बाजार को गिरने से रोक सकते हैं। बड़े Global Shocks या व्यापक Selling Pressure के दौरान घरेलू निवेश भी पर्याप्त नहीं हो सकता।
भारतीय शेयर बाजार के लिए क्या है इसका मतलब?
DII Investment में यह बढ़ोतरी भारतीय Equity Market के लिए एक महत्वपूर्ण Structural Change हो सकती है।
अगर घरेलू निवेशकों की भागीदारी इसी तरह बढ़ती रहती है, तो भारतीय बाजार पर विदेशी निवेश Flow में अचानक होने वाले बदलाव का असर पहले की तुलना में कुछ कम हो सकता है।
दूसरे शब्दों में, FII Selling के मुकाबले DII Buying का बढ़ता आधार बाजार को एक घरेलू Support System दे रहा है।
हालांकि, बाजार की दिशा केवल FII और DII Flow से तय नहीं होती। Corporate Earnings, Valuations, Interest Rates, Economic Growth और Global Market Conditions भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
