Federal Reserve का नया संकेत – ब्याज दरों में कटौती की संभावना
अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बनी हुई है, हालांकि फिलहाल वह सतर्क रुख अपनाए हुए है।
यह बड़ा संकेत Fed Chairman Jerome Powell ने वायोमिंग के Jackson Hole में आयोजित वार्षिक Monetary Policy Conclave के दौरान दिया।
Powell ने कहा कि आर्थिक अनिश्चितता बहुत अधिक है, जिससे नीतिगत निर्णय लेना मुश्किल हो गया है।
Tariffs और US Economy पर असर
Powell ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि नए अमेरिकी Tariffs का असर अब साफ नजर आ रहा है।
- वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
- उन्होंने Tax, Trade और Immigration Policy में हाल के बड़े बदलावों का भी जिक्र किया।
Powell के अनुसार
- Labor Market अभी भी मजबूत है।
- US Economy लचीली है, लेकिन Downside Risks बढ़ रहे हैं।
- रोजगार पर नकारात्मक असर की आशंका भी जताई गई।

Inflation और Recession का खतरा
Powell ने चेतावनी दी कि नए Tariffs महंगाई (Inflation) को बढ़ा सकते हैं और यह स्थिति Recession का खतरा पैदा कर सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए Tariffs का असर महंगाई पर अस्थायी माना जाना चाहिए।
Stock Market में Powell के बयान का असर
Powell के ब्याज दरों में कटौती की संभावना के संकेत के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी आई।
- Dow Jones Industrial Average 865 अंक (1.9%) चढ़कर नए उच्च स्तर पर पहुंचा।
- S&P 500 में 1.6% की बढ़त रही।
- Nasdaq Composite लगभग 2% चढ़ा।
कंपनी-वार बढ़त
- Nvidia के शेयर 1.3% ऊपर रहे।
- Meta, Alphabet और Amazon के शेयर 2% से ज्यादा बढ़े।
- Tesla के शेयर लगभग 5% उछले।
Interest Rate Cuts का हालिया ट्रेंड
- जुलाई 2025 की FOMC (Federal Open Market Committee) बैठक में लगातार 5वीं बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। इन्हें 4.25%–4.5% पर बनाए रखा गया।
- December 2024 में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई थी।
- इससे पहले September 2024 में 50 बेसिस पॉइंट्स और November 2024 में 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई थी।
निष्कर्ष
Federal Reserve ने संकेत दिया है कि आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए ब्याज दरों में आगे कटौती हो सकती है। हालांकि फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए कोई त्वरित निर्णय नहीं लिया गया है। Tariffs से बढ़ती महंगाई और Recession का खतरा नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
