Fertiliser Crisis किसानों के लिए बड़ी चुनौती

Fertiliser Crisis किसानों के लिए बड़ी चुनौती

भारत में 2024 का Southwest Monsoon उम्मीद से बेहतर रहा। जून से अगस्त तक 61.3% बारिश normal या उससे ऊपर दर्ज की गई। हालांकि, बिहार, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बारिश कम रही। अच्छी बारिश का असर खेती पर पड़ा और किसानों ने बड़ी मात्रा में खरीफ फसलों की बुआई की। इसके चलते Fertiliser Demand में अचानक तेज़ी आई।


Fertiliser Sale Impact

जब खेती का क्षेत्र बढ़ता है, तो मिट्टी की नमी बनाए रखने और उत्पादन बढ़ाने के लिए Fertilisers की खपत भी तेजी से बढ़ जाती है।

  • Urea की बिक्री (अप्रैल-जुलाई 2024) 75.86 लाख टन (पिछले साल से अधिक)
  • DAP की खपत 29.44 लाख टन
  • NPKS Fertilisers रिकॉर्ड स्तर पर मांग

इससे साफ है कि किसानों की बुआई बढ़ने के साथ Fertiliser Consumption भी नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है।


Import Dependency

भारत की घरेलू Fertiliser Production क्षमता सीमित है, जिसके चलते Import पर भारी निर्भरता बनी रहती है।

Urea Import (Table 2A)

  • China 21.48 लाख टन
  • Oman 15.96 लाख टन
  • Russia 15.93 लाख टन
  • कुल Import 80.06 लाख टन

DAP Import (Table 2B)

  • China 12.87 लाख टन
  • Saudi Arabia 11.65 लाख टन
  • Morocco 10.04 लाख टन
  • कुल Import 45.50 लाख टन

Shortfall और Farmers की मुश्किलें

जुलाई-अगस्त खरीफ बुआई का समय होता है, जब DAP और phosphate fertilisers की खपत सबसे अधिक होती है। लेकिन समय पर सप्लाई न होने से किसानों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा।

कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि किसानों को minimum requirement पूरी करने में भी दिक्कत हुई। कुछ किसानों ने future demand को देखते हुए Fertiliser का स्टॉक करना शुरू कर दिया।


Policy Lessons

Experts का मानना है कि सरकार को Fertiliser Distribution और Import Strategy पर जल्द ध्यान देना चाहिए।

  • Nitrogen-based fertilisers (जैसे Urea) की मांग लगातार बढ़ रही है।
  • Phosphate-based fertilisers (जैसे DAP) खरीफ सीजन में बेहद जरूरी हो जाते हैं।
  • Pulses और Oilseeds जैसी फसलों के लिए Nitrogen की खपत ज्यादा होती है।
  • किसानों तक Fertiliser की timely supply पहुंचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

निष्कर्ष Fertiliser Crisis किसानों की पैदावार और खेती की लागत दोनों पर असर डाल रही है। अगर Fertiliser की availability और distribution system में सुधार नहीं हुआ, तो किसानों की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top