FII फिर से सक्रिय बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में दिखी नई चमक

FII फिर से सक्रिय बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में दिखी नई चमक

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी निवेशकों (FII) की सक्रियता एक बार फिर लौट आई है।
अक्टूबर के पहले पखवाड़े में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने फाइनेंशियल सेक्टर में ₹8,276 करोड़ की नई खरीदारी की।

पिछले कुछ महीनों में रिटेल और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के मुकाबले FII निवेश धीमा पड़ गया था, लेकिन अब वे फिर से भारतीय मार्केट में वापसी कर रहे हैं।


बैंकिंग सेक्टर में मजबूत खरीदारी

एफआईआई की ताजा दिलचस्पी बैंकिंग स्टॉक्स में देखी जा रही है।
Q2FY26 के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे, जिससे कई विदेशी फंड मैनेजर्स ने पिटे हुए बैंकिंग स्टॉक्स में फिर से एंट्री ली।

  • HDFC Bank जैसे प्रमुख बैंकों के मजबूत परिणामों ने सेक्टर में सकारात्मक माहौल बनाया।
  • PSU Banks की रैली ने भी निवेशकों को आकर्षित किया और Bank Nifty Index को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में बैंक निफ्टी 4.7% बढ़ा, जबकि बेंचमार्क निफ्टी 3% ऊपर रहा।


ऑटो सेक्टर में FII की एंट्री

जीएसटी रिलीफ और कंज्यूमर डिमांड में सुधार के चलते ऑटो सेक्टर में भी विदेशी खरीदारी देखने को मिली।
जीएसटी रिफॉर्म्स के बाद ऑटो कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को आकर्षक प्राइसिंग पर पेश कर रही हैं, जिससे FII और Retail Investors दोनों का भरोसा बढ़ा है।


अन्य सेक्टरों में निवेश और फंड फ्लो

बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के अलावा, एफआईआई ने 11 अन्य सेक्टरों में कुल ₹15,593 करोड़ का निवेश किया।
हालांकि, सितंबर के दूसरे भाग में FPI ने लगभग ₹19,647 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि उसी महीने की पहली छमाही में उन्होंने ₹16,737 करोड़ का निवेश किया था।

अक्टूबर की शुरुआत में ऑटोमोबाइल और मेटल सेक्टर में भी FII की मजबूत खरीदारी देखी गई।


FII Sentiment का Market पर असर

अगर FII नवंबर माह में भी नेट बायर्स बने रहते हैं, तो बैंकिंग, फाइनेंशियल, ऑटो और मेटल सेक्टर में और तेजी देखने को मिल सकती है।
विदेशी फंड्स का यह “Risk-On Mood” संकेत देता है कि भारतीय इकॉनमी और कॉरपोरेट अर्निंग्स पर उनका भरोसा फिर से मजबूत हुआ है।


रिटेल निवेशकों के लिए संकेत

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि “FII footprints” को फॉलो करना आम निवेशकों के लिए एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।
अगर विदेशी निवेशक बैंकिंग, ऑटो और मेटल जैसे सेक्टरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, तो इन थीम्स में Medium to Long Term Investment आकर्षक साबित हो सकता है।

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