FII vs DII विदेशी बिकवाली के बीच बाजार क्यों टिका रहा? फरवरी में DII खरीदारी क्यों घटी?
पिछले कुछ महीनों से भारतीय शेयर बाजार में Foreign Institutional Investors (FII) की लगातार बिकवाली देखने को मिली है। इसके विपरीत Domestic Institutional Investors (DII) ने आक्रामक खरीदारी कर बाजार को संतुलित बनाए रखा।
इसी का परिणाम है कि भारी FII सेलिंग के बावजूद
- BSE Sensex
- Nifty 50
अब भी अपने ऑल टाइम हाई स्तरों के करीब बने हुए हैं।
इसका बड़ा श्रेय DII की लगातार खरीदारी को जाता है।
फरवरी में क्यों घटी DII की खरीदारी?
हालांकि पिछले महीनों में DII ने बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया, लेकिन फरवरी में उनकी खरीदारी में कमी देखी गई।
संभावित कारण
- बाजार में लो रिटर्न
- जियोपॉलिटिकल तनाव
- मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव
- अप्रैल 2025 के बाद DII निवेश का सबसे निचला स्तर
यानी घरेलू संस्थागत निवेशकों का इक्विटी में निवेश फरवरी में कमजोर पड़ा।
Midcap और Smallcap में ज्यादा असर
पिछले कुछ समय में
- मिडकैप शेयरों में तेज करेक्शन
- स्मॉलकैप में भारी वोलैटिलिटी
- थीमेटिक फंड्स का कमजोर प्रदर्शन
घरेलू निवेश का बड़ा हिस्सा इन सेगमेंट्स में आया था।
जब इन कैटेगरी में रिटर्न घटा, तो निवेश की रफ्तार भी धीमी पड़ गई।
सोना-चांदी बना नया आकर्षण
म्यूचुअल फंड निवेशकों ने
- सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी का फायदा उठाया
- कीमती धातुओं में अपना निवेश लगभग दोगुना किया
इक्विटी से आंशिक पैसा commodities की ओर शिफ्ट हुआ।
15 महीनों का बाजार प्रदर्शन
भारतीय बाजारों ने पिछले 15 महीनों में अपेक्षाकृत निराशाजनक रिटर्न दिए हैं।
इस कारण
- SIP flows तो जारी रहे
- लेकिन lump-sum और tactical निवेश में कमी आई
बाजार के लिए आगे क्या संकेत?
| फैक्टर | प्रभाव |
|---|---|
| FII Selling | Short-term Pressure |
| DII Buying Support | Market Stability |
| Midcap-Smallcap Correction | Volatility |
| Gold-Silver Shift | Asset Reallocation |
अगर DII की खरीदारी और कमजोर हुई, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
लेकिन SIP flows और long-term domestic savings अभी भी बाजार का मजबूत आधार हैं।
निवेशकों के लिए रणनीति
- Diversification बनाए रखें
- Midcap/Smallcap में चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाएं
- Asset allocation में संतुलन रखें
- Long-term horizon पर फोकस करें
