मार्च में FPI की बड़ी Selling, 15 दिनों में ₹52,704 करोड़ निकाले

मार्च में FPI की भारी बिकवाली 15 दिनों में ₹52,704 करोड़ निकाले, बाजार पर बढ़ा दबाव

मार्च 2026 के पहले पखवाड़े में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी की है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार Foreign Portfolio Investors (FPI) ने 15 दिनों के भीतर लगभग ₹52,704 करोड़ की Selling की है।

इस भारी आउटफ्लो के पीछे Geopolitical Tension, रुपये की कमजोरी और Crude Oil Prices में तेजी जैसे प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। इन परिस्थितियों के चलते भारत की Economic Growth और Corporate Earnings पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


फरवरी में आया था मजबूत विदेशी निवेश

मार्च की इस भारी बिकवाली से पहले फरवरी में विदेशी निवेशकों का रुख काफी सकारात्मक दिखाई दिया था।

फरवरी 2026 में Foreign Portfolio Investors ने भारतीय Equity Market में लगभग ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर था।

हाल के महीनों का डेटा इस प्रकार है:

  • जनवरी 2026 ₹35,962 करोड़ की निकासी
  • दिसंबर 2025 ₹22,611 करोड़ की निकासी
  • नवंबर 2025 ₹3,765 करोड़ की निकासी

मार्च में अब तक (लगभग 13 मार्च तक) विदेशी निवेशकों ने ₹52,704 करोड़ की बड़ी Selling कर दी है।


West Asia तनाव और Oil Prices का असर

विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी निवेशकों की इस निकासी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता Geopolitical Conflict है।

न्यूज एजेंसी Press Trust of India के अनुसार मार्केट एक्सपर्ट Waqar Javed Khan का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में संभावित संघर्ष की आशंका से Brent Crude Oil की कीमत $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।

इसके अलावा

  • भारतीय Rupee करीब ₹92 प्रति Dollar के आसपास कमजोर बना हुआ है
  • Global Bond Yield बढ़ने से भी विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं

अन्य Emerging Markets से बढ़ी प्रतिस्पर्धा

मार्केट रणनीतिकार V K Vijayakumar का मानना है कि कई वैश्विक कारकों ने विदेशी निवेशकों के निवेश फैसलों को प्रभावित किया है।

उनके अनुसार

  • West Asia का तनाव
  • रुपये की कमजोरी
  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतें

इन सभी वजहों से भारत में निवेश का आकर्षण कुछ कम हुआ है।

पिछले 18 महीनों में भारत से अपेक्षाकृत कमजोर रिटर्न मिलने के कारण विदेशी निवेशक अब अन्य उभरते बाजारों की ओर भी रुख कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • South Korea
  • Taiwan
  • China

मार्च के दूसरे हिस्से के लिए Outlook सतर्क

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत से FPI Outflow लंबे समय तक जारी रहने की संभावना कम है

अच्छी बात यह है कि खासकर Financial Sector Stocks में हाल की गिरावट के बाद कई कंपनियों के Valuation घरेलू निवेशकों के लिए आकर्षक हो गए हैं।

Waqar Javed Khan के अनुसार मार्च के दूसरे हिस्से में बाजार का रुख इन कारकों पर निर्भर करेगा:

  • Geopolitical Tension में कमी
  • Banking Sector के बेहतर Q4 Results
  • Consumption Sector में मजबूत कमाई

अगर ये कारक सकारात्मक रहते हैं तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम हो सकती है।

हालांकि अगर Crude Oil Prices में और तेजी आती है या वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो बाजार में दबाव जारी रह सकता है।


निष्कर्ष

मार्च में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव जरूर बढ़ा है। लेकिन हाल की गिरावट के बाद कई Quality Stocks के Valuation अधिक आकर्षक हो गए हैं।

ऐसे में घरेलू निवेशकों के लिए यह समय सावधानी के साथ Selective Investment Strategy अपनाने का हो सकता है।

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