HSBC की रिपोर्ट FII बिकवाली और ग्लोबल स्लोडाउन से बाजार पर दबाव
भारत का शेयर बाजार 2025 की शुरुआत से ही दबाव में है। HSBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक, IT कंपनियां ग्लोबल स्लोडाउन से जूझ रही हैं और बैंकिंग सेक्टर पर भी दोहरी मार पड़ी है। इसका सीधा असर बाजार और निवेशकों की धारणा पर दिख रहा है।
IT सेक्टर पर दबाव
- दुनिया भर में IT सेवाओं की मांग घटने से टेक कंपनियों की कमाई कमजोर हो रही है।
- निवेशकों को इन शेयरों से कम रिटर्न की आशंका है, इसलिए वे पैसा निकाल रहे हैं।
बैंकिंग सेक्टर की चुनौतियाँ
- लोन की मांग कम हुई है।
- क्रेडिट कॉस्ट (उधार की लागत) बढ़ गई है।
- दोनों वजहों से बैंकिंग सेक्टर निवेशकों को ज्यादा जोखिम भरा लग रहा है।

FII की बड़ी बिकवाली
- 2025 की शुरुआत से अब तक FIIs ने 1.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा भारतीय बाजार से निकाले।
- केवल IT और बैंकिंग ही नहीं, FIIs ने ऑयल एंड गैस, पावर, हेल्थकेयर, FMCG, रियल एस्टेट और कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स से भी पैसा निकाला।
- वे लार्जकैप शेयर बेच रहे हैं, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा रहे हैं।
भारतीय बाजार का प्रदर्शन
- सितंबर 2024 से भारत का बाजार बाकी इमर्जिंग मार्केट्स की तुलना में 24% कमजोर रहा है।
- पिछले 1 साल में सेंसेक्स और निफ्टी ने निगेटिव रिटर्न दिए हैं।
- कंपनियों की कमाई (earnings) पर भी दबाव:
- 11 महीनों में से 6 में FIIs ने होल्डिंग्स घटाई।
- लगातार 5 तिमाहियों से कंपनियों की कमाई सिर्फ सिंगल डिजिट में बढ़ी है।
- पहले यह ग्रोथ सालाना 25% तक रहती थी।
2025 और आगे का अनुमान
- HSBC FY25 के लिए कमाई की ग्रोथ 11% अनुमानित, लेकिन यह घटकर 8-9% तक रह सकती है।
- रिकवरी होगी, लेकिन धीमी रफ्तार से।
- Goldman Sachs: भारत में वैश्विक फंड्स की हिस्सेदारी दो दशक के निचले स्तर पर।
- IPO और FPO की रिकॉर्ड-हाई इक्विटी सप्लाई भी बाजार पर दबाव बना रही है।
पोजिटिव साइड और उम्मीदें
- Geojit Investments GST सुधार और मजबूत GDP ग्रोथ से FY26 और FY27 में कमाई बेहतर हो सकती है।
- Morgan Stanley भारत का लंबी अवधि का भविष्य उज्ज्वल है।
- रिधम देसाई भारत आने वाले दशकों में वैश्विक उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी ले सकता है।
- हालांकि, उन्होंने चेताया कि जब दुनिया में तेजी आती है, तो भारत पिछड़ सकता है — यही अभी देखने को मिल रहा है।
निष्कर्ष
HSBC की रिपोर्ट साफ दिखाती है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल ग्लोबल स्लोडाउन, IT और बैंकिंग दबाव और FII बिकवाली से जूझ रहा है। शॉर्ट-टर्म में चुनौतियाँ भले हों, लेकिन लॉन्ग-टर्म आउटलुक अभी भी मजबूत है।
निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और बैलेंस्ड एप्रोच अपनाने का है।
