रिकॉर्ड बिजली मांग से चमका IEX का कारोबार, Q1 FY27 में ट्रेडिंग वॉल्यूम 15.9% बढ़ा
देशभर में रिकॉर्ड गर्मी और बढ़ती बिजली की मांग का सीधा फायदा Indian Energy Exchange (IEX) को मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही में कंपनी के पावर ट्रेडिंग वॉल्यूम और बिजली की कीमतों, दोनों में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली है।
कंपनी के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान उसका कुल पावर ट्रेडिंग वॉल्यूम 15.9% बढ़कर 37,534 मिलियन यूनिट (MU) पहुंच गया। बढ़ती बिजली मांग और सप्लाई पर दबाव के कारण स्पॉट मार्केट में बिजली की कीमतों में भी दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
इस सकारात्मक कारोबारी अपडेट के बाद शुक्रवार, 3 जुलाई को IEX के शेयर में हल्की तेजी देखने को मिली और यह 0.25% की बढ़त के साथ 123.81 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 11,020 करोड़ रुपये है।
रिकॉर्ड गर्मी से बढ़ी देश की बिजली खपत
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी दर्ज की गई, जिसके कारण बिजली की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की कुल बिजली खपत बढ़कर 485.4 बिलियन यूनिट पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.8% अधिक है। इस दौरान मई महीने में देश की पीक पावर डिमांड 270.8 गीगावाट (GW) तक पहुंच गई, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।
स्पॉट मार्केट में बिजली की कीमतों में तेज उछाल
बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति का असर बिजली की कीमतों पर भी देखने को मिला।
IEX के डे-अहेड मार्केट (DAM) में मार्केट क्लियरिंग प्राइस 15.7% बढ़कर 5.1 रुपये प्रति यूनिट हो गया। वहीं, रियल-टाइम मार्केट (RTM) में औसत कीमत 13.8% बढ़कर 4.5 रुपये प्रति यूनिट पहुंच गई।
यह संकेत देता है कि बिजली की मांग मजबूत बनी रही, जबकि आपूर्ति पक्ष पर दबाव कायम रहा, जिससे एक्सचेंज पर ऊंचे दाम प्राप्त हुए।
जून में और मजबूत रहा प्रदर्शन
जून का महीना IEX के लिए विशेष रूप से मजबूत रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जून पिछले एक दशक के सबसे शुष्क जून महीनों में शामिल रहा और मानसून की बारिश सामान्य से लगभग 40% कम रही।
इसका असर बिजली की खपत पर भी पड़ा और जून में देश की कुल बिजली मांग 11.6% बढ़कर 166.5 बिलियन यूनिट तक पहुंच गई।
इसी अवधि में IEX का कुल ट्रेडेड वॉल्यूम 12.5% बढ़कर 12,210 मिलियन यूनिट हो गया।
जून में बिजली की कीमतों में बड़ी तेजी
जून महीने में डे-अहेड मार्केट (DAM) का क्लियरिंग प्राइस 32.4% बढ़कर 5.2 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच गया। वहीं, रियल-टाइम मार्केट (RTM) की औसत कीमत 17% बढ़कर 4.4 रुपये प्रति यूनिट रही।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय पावर मार्केट में सप्लाई-साइड दबाव अभी भी बना हुआ है।
रियल-टाइम मार्केट बना ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन
चालू तिमाही में IEX के लिए सबसे मजबूत प्रदर्शन रियल-टाइम मार्केट (RTM) से आया।
- RTM वॉल्यूम 23.5% बढ़कर 16,019 MU पहुंच गया।
- पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 12,975 MU था।
- केवल जून महीने में RTM वॉल्यूम 25.7% बढ़कर 5,420 MU हो गया।
यह संकेत देता है कि बिजली कंपनियां और औद्योगिक उपभोक्ता तत्काल बिजली खरीद के लिए तेजी से एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।
डे-अहेड और टर्म मार्केट में भी रही मजबूती
डे-अहेड मार्केट (DAM) और हाई-प्राइस DAM का संयुक्त वॉल्यूम तिमाही के दौरान 13,344 MU रहा, जो सालाना आधार पर 7.6% अधिक है। हालांकि, जून महीने में इस सेगमेंट का वॉल्यूम 6.6% घटकर 4,304 MU रहा।
वहीं, डे-अहेड कंटिजेंसी और टर्म-अहेड मार्केट में मजबूत वृद्धि देखने को मिली।
- तिमाही वॉल्यूम 22.9% बढ़कर 5,344 MU रहा।
- जून महीने में इसमें 58.7% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई और वॉल्यूम 1,533 MU तक पहुंच गया।
यह दर्शाता है कि कंपनियां भविष्य की बिजली जरूरतों को लेकर पहले से अधिक सक्रिय रणनीति अपना रही हैं।
ग्रीन एनर्जी सेगमेंट में भी जारी रही वृद्धि
ग्रीन डे-अहेड मार्केट (GDAM) और अन्य ग्रीन मार्केट सेगमेंट का संयुक्त ट्रेडिंग वॉल्यूम 2,827 MU रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.3% अधिक है।
हालांकि, जून महीने में यह आंकड़ा घटकर 953 MU रहा। इस दौरान ग्रीन डे-अहेड मार्केट का औसत मूल्य 3.79 रुपये प्रति यूनिट दर्ज किया गया।
REC ट्रेडिंग में आई बड़ी गिरावट
रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट (REC) ट्रेडिंग सेगमेंट में इस तिमाही कमजोरी देखने को मिली।
- कुल 9.77 लाख REC का कारोबार हुआ।
- यह पिछले वर्ष की तुलना में 81.4% कम है।
- जून महीने में केवल 2.49 लाख REC ट्रेड किए गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित सेल ऑर्डर (Sell Bids) के कारण क्लियरिंग प्राइस में बढ़ोतरी देखी गई।
