वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत बना Stability का केंद्र, ICICI Prudential AMC के MD Nimesh Shah ने बताई बड़ी वजह
दुनिया भर में बढ़ती geopolitical tensions, economic uncertainty और rising interest rates के बीच भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत और स्थिर बनी हुई है।
यह बात Nimesh Shah ने कही, जो ICICI Prudential Asset Management Company के Managing Director हैं।
उन्होंने बताया कि इस समय global markets कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन India के economic fundamentals अभी भी मजबूत हैं, जो देश को बाकी emerging economies से अलग बनाते हैं।
Global Challenges के बावजूद मजबूत Economic Fundamentals
Moneycontrol FiDEX event में बोलते हुए Nimesh Shah ने कहा कि कई वैश्विक समस्याओं के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति संतुलित बनी हुई है।
उनके अनुसार भारत के कुछ प्रमुख macro indicators अभी भी मजबूत हैं, जैसे
- Fiscal deficit नियंत्रण में है
- Current account deficit manageable है
- Banks की balance sheet पहले से मजबूत हुई है
- Corporate sector पर debt burden कम हुआ है
उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत को एक स्थिर अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।
उनके शब्दों में
“आज की अनिश्चित दुनिया में भारत एक stable island की तरह है।”

Domestic Demand दे रही भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती
Nimesh Shah का मानना है कि भारत की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा कारण strong domestic demand है।
उन्होंने कहा कि भारत की growth मुख्य रूप से domestic consumption पर आधारित है। यही कारण है कि global shocks का असर भारतीय economy पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
उन्होंने यह भी बताया कि:
- India services exports में काफी मजबूत है
- Manufacturing exports अभी भी सीमित हैं
इस वजह से global tariffs या trade wars का सीधा प्रभाव भारत की economy पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है।
हालांकि उन्होंने यह भी माना कि global financial markets आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए अमेरिका में interest rates में बदलाव का असर भारत के बाजारों पर भी पड़ सकता है।
Market Valuation अब Historical Average के करीब
Nimesh Shah ने बताया कि वर्ष 2024 के दौरान भारतीय stock market valuations काफी महंगे माने जा रहे थे।
लेकिन अब स्थिति में सुधार देखने को मिला है।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में
- Corporate earnings में अच्छी वृद्धि हुई
- लेकिन stock market लगभग flat रहा
इस वजह से valuation धीरे-धीरे normal स्तर पर वापस आ गए हैं।
उनके मुताबिक,
“पहले global markets की तुलना में भारत महंगा दिखता था, लेकिन अब Indian market valuations historical average के करीब आ गए हैं।”
Government Policies से आने वाले वर्षों में Growth की उम्मीद
उन्होंने कहा कि सरकार की कई नीतियों का असर आने वाले वर्षों में दिखाई देगा।
इनमें शामिल हैं
- Income tax cuts
- GST में reductions
- Liquidity बढ़ाने के लिए policy support
Nimesh Shah का मानना है कि इन कदमों का असर धीरे-धीरे दिखाई देगा और FY26 तथा FY27 में corporate earnings growth और तेज हो सकती है।
Consumption और Infrastructure में मजबूती के संकेत
भारतीय अर्थव्यवस्था के कई sectors में मजबूती के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि
- Cement demand लगातार बढ़ रही है
- Power consumption मजबूत है
- Housing sector में activity तेज हुई है
- Automobile sales में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है
ये सभी संकेत बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में long-term growth potential मजबूत बना हुआ है।
Domestic Investors की बढ़ती ताकत
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निवेशकों की बाजार में भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि
- 2018 में mutual fund investors की संख्या करीब 1 करोड़ थी
- आज यह बढ़कर लगभग 6 करोड़ हो चुकी है
हर महीने SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए लगभग ₹30,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा रहा है।
इसका बड़ा असर यह हुआ है कि अब
- Domestic Institutional Investors (DII) की ताकत बढ़ी है
- अगर Foreign Institutional Investors (FII) पैसा निकालते हैं तो भी बाजार को सहारा मिल जाता है
निवेशकों के लिए Discipline सबसे जरूरी
अंत में Nimesh Shah ने निवेशकों को सलाह दी कि निवेश करते समय discipline और long-term planning बनाए रखना जरूरी है।
उनका कहना है कि निवेश हमेशा financial goals को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
उन्होंने इसे समझाने के लिए एक दिलचस्प उदाहरण दिया:
“जब आप कार चलाते हैं तो बार-बार rear-view mirror देखने की जरूरत नहीं होती।”
यानी निवेश में भी हर छोटी market movement पर प्रतिक्रिया देने के बजाय long-term strategy पर ध्यान देना चाहिए।
