Global दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निफ्टी और सेंसेक्स लाल निशान में

Global दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, निफ्टी और सेंसेक्स लाल निशान में

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में NIFTY 50 लगभग 129 अंकों की गिरावट के साथ ट्रेड करता दिखाई दिया, जबकि BSE Sensex में करीब 400 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है।


एशियाई बाजारों की कमजोरी का असर

सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट का माहौल देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण जोखिम लेने की क्षमता कम हो गई है।

एशियाई बाजारों की इस कमजोरी का सीधा असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा, जिससे घरेलू इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे।


विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

भारतीय बाजार पर दबाव की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी है।

हाल के सत्रों में Foreign Portfolio Investors ने बड़े पैमाने पर भारतीय इक्विटी से पैसा निकाला है। इससे बाजार की लिक्विडिटी और निवेशकों का सेंटिमेंट दोनों प्रभावित हुए हैं।


कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

वैश्विक कमोडिटी बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है।

कच्चे तेल की कीमत करीब 1% बढ़कर लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है।

ऊंचे तेल दाम भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय होते हैं क्योंकि इससे महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव बढ़ सकता है।


मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रहा है।

क्षेत्र में संघर्ष और अनिश्चितता बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका असर इक्विटी बाजारों पर दिख रहा है।


रुपये में लगातार कमजोरी

सोमवार को भारतीय मुद्रा भी दबाव में रही।

Indian Rupee करीब 13 पैसे कमजोर होकर 92.43 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

रुपये में कमजोरी की मुख्य वजह विदेशी निवेशकों की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें मानी जा रही हैं।


निष्कर्ष

वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मिडिल ईस्ट में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारकों के कारण फिलहाल भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता कम नहीं होती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती नहीं है, तब तक बाजार में वोलाटिलिटी बनी रह सकती है।

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