Anchor Investors in IPO Lock-in खत्म होने के बाद कितने शेयर बेचते हैं?

Anchor Investors in IPO Lock-in खत्म

IPO में Anchor Investors की हिस्सेदारी को अक्सर बड़े संस्थागत निवेशकों के भरोसे के संकेत के रूप में देखा जाता है। लेकिन क्या lock-in period खत्म होते ही ये निवेशक अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच देते हैं? SEBI की एक स्टडी इस सवाल की तस्वीर काफी स्पष्ट करती है।

SEBI की 242 Mainboard IPOs पर की गई analysis के मुताबिक, anchor investors आमतौर पर lock-in खत्म होते ही पूरी हिस्सेदारी नहीं बेचते। उनकी selling धीरे-धीरे होती है और करीब एक साल में शुरुआती anchor allocation की लगभग आधी value बिक चुकी होती है

इसका मतलब है कि शुरुआती unlock के समय दिखने वाली selling को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि anchor investors पूरी तरह stock से बाहर निकल गए हैं।

Anchor Investors कौन होते हैं?

Anchor Investors बड़े institutional investors होते हैं, जिन्हें Qualified Institutional Buyers (QIBs) की category में रखा जाता है।

IPO खुलने से एक दिन पहले कंपनी, Book Running Lead Managers (BRLMs) से सलाह के बाद, eligible anchor investors को कुछ shares allocate करती है।

IPO से पहले बड़े institutional investors को shares का allocation मिलना बाजार में कंपनी के issue के प्रति institutional interest का संकेत माना जाता है। इससे IPO की subscription period के दौरान investor confidence को भी support मिल सकता है।

IPO में Anchor Investment का सबसे बड़ा हिस्सा किसका है?

SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, anchor allocation में सबसे बड़ी हिस्सेदारी Foreign Portfolio Investors (FPIs) और Mutual Funds (MFs) की रही।

Anchor allocation की कुल value में:

  • FPIs 43.8%
  • Mutual Funds 38.5%
  • Other QIBs 10.5%
  • AIFs 5.3%
  • Body Corporates बहुत छोटी हिस्सेदारी

इससे साफ है कि IPO के anchor book में विदेशी संस्थागत निवेशकों और mutual funds की भूमिका सबसे बड़ी रहती है।

बड़े IPO में FPIs और Mutual Funds का दबदबा

SEBI की study में IPO size और anchor investor composition के बीच भी अंतर देखने को मिला।

छोटे IPO में AIFs, Other QIBs और Body Corporates की anchor participation अपेक्षाकृत ज्यादा रही। लेकिन जैसे-जैसे issue size बढ़ा, इनकी हिस्सेदारी घटती गई।

खासकर ₹1,000 करोड़ से ज्यादा के बड़े IPOs में anchor allocation मुख्य रूप से FPIs और mutual funds के बीच रहा।

ऐसे बड़े issues में:

  • FPIs की हिस्सेदारी करीब 45%-47%
  • Mutual Funds की हिस्सेदारी करीब 38%-42%
  • Other QIBs की हिस्सेदारी करीब 9%-12%

रही।

Lock-in खत्म होते ही Anchor Investors पूरी हिस्सेदारी नहीं बेचते

यह SEBI study का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है।

Anchor investors lock-in की पहली exit window खुलते ही बड़ी मात्रा में shares बेचने के बजाय धीरे-धीरे अपनी holdings कम करते हैं

SEBI के आंकड़ों के मुताबिक

Unlock के बाद अवधिकुल Anchor Exit
30 दिन3.2%
60 दिनकरीब 8%
90 दिनकरीब 17.3%

यानी शुरुआती 90 दिनों के बाद भी anchor investors के पास उनकी शुरुआती allocation का बड़ा हिस्सा मौजूद रहता है।

समय बढ़ने के साथ selling धीरे-धीरे बढ़ती जाती है।

छोटे IPO में Anchor Selling ज्यादा रही

SEBI को IPO size और anchor investor selling के बीच inverse relationship देखने को मिला।

यानी छोटे IPO में anchor investors की selling अपेक्षाकृत ज्यादा रही।

₹0-250 करोड़ के IPOs में:

  • 30 दिन बाद selling 9.1%
  • 60 दिन बाद selling 20.3%
  • 90 दिन बाद selling 32.4%

यह बड़े issue sizes की तुलना में काफी अधिक था।

इससे संकेत मिलता है कि IPO का आकार भी anchor investors के post-listing behaviour को प्रभावित कर सकता है।

FPI और Mutual Fund की Selling में अंतर

SEBI के आंकड़ों में अलग-अलग institutional categories के exit behaviour में भी अंतर देखने को मिला।

पहली exit window में

  • FPIs करीब 3% selling
  • Mutual Funds करीब 3% selling

60 दिन बाद

  • FPIs करीब 9%
  • Mutual Funds करीब 7%

दूसरी exit window के बाद

  • FPIs: करीब 20%
  • Mutual Funds: करीब 15%

SEBI के मुताबिक, हर phase में FPIs का median exit percentage mutual funds से ज्यादा रहा। साथ ही FPI selling में variation भी mutual funds की तुलना में अधिक रहा।

एक साल में कितनी Anchor Holding बिकती है?

SEBI ने 2024 के अंत तक listed 167 IPOs का long-term analysis भी किया।

इसमें anchor investors की cumulative selling समय के साथ लगातार बढ़ती दिखी:

  • 30 दिन करीब 4%
  • 60 दिन करीब 9%
  • 90 दिन करीब 19%
  • 180 दिन करीब 34%
  • 1 साल करीब 51%

यानी एक साल पूरा होने तक anchor investors अपनी शुरुआती allocation का लगभग आधा हिस्सा बेच चुके थे

यह आंकड़ा एक महत्वपूर्ण बात बताता है—पहली unlock window के आसपास दिखाई देने वाली selling, anchor investors की पूरी exit का सिर्फ शुरुआती हिस्सा होती है।

एक साल बाद किस Category ने सबसे ज्यादा Shares बेचे?

एक साल बाद अलग-अलग investor categories की selling में भी बड़ा अंतर दिखाई दिया।

Investor Category1 साल बाद बेची गई Anchor Allocation
FPIsकरीब 60%
Body Corporatesकरीब 58%
AIFsकरीब 55%
Other QIBsकरीब 46%
Mutual Fundsकरीब 38%

इस डेटा में FPIs सबसे ज्यादा selling करने वाली category रहे, जबकि mutual funds की cumulative selling सबसे कम रही।

90 दिन बाद FPI और mutual fund selling करीब 19% बनाम 15% थी, जबकि एक साल बाद यह अंतर बढ़कर करीब 60% बनाम 38% हो गया।

Investors के लिए इसका क्या मतलब है?

Anchor lock-in खत्म होने की खबर आने पर बाजार में अक्सर selling pressure को लेकर चिंता बढ़ सकती है। लेकिन SEBI के आंकड़े बताते हैं कि unlock का मतलब तुरंत पूरी institutional holding की selling नहीं होता

Anchor investors का exit आमतौर पर phased तरीके से होता है। इसलिए किसी IPO में lock-in expiry को देखते समय केवल पहले कुछ दिनों की selling के बजाय कई महीनों के cumulative selling pattern को देखना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

साथ ही, यह भी समझना जरूरी है कि institutional investors की selling का मतलब अपने आप यह नहीं है कि कंपनी के fundamentals खराब हैं। उनका exit portfolio strategy, valuation, liquidity और investment objectives जैसे कई factors से प्रभावित हो सकता है।

निष्कर्ष

SEBI की study से पता चलता है कि Anchor Investors IPO lock-in खत्म होते ही अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं बेचते। शुरुआती unlock window में selling सीमित रहती है, लेकिन समय के साथ cumulative exit बढ़ता जाता है।

SEBI के long-term analysis के मुताबिक, एक साल बाद anchor investors की शुरुआती allocation का करीब 51% हिस्सा बिक चुका था। FPIs की selling करीब 60% रही, जबकि mutual funds की selling करीब 38% थी।

इसलिए IPO में anchor lock-in expiry को समझते समय केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि कितने shares unlock हुए हैं। असली तस्वीर जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि unlock के बाद institutional investors वास्तव में कितनी और किस गति से selling कर रहे हैं।

Disclaimer यह लेख केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी को किसी IPO या शेयर में निवेश की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेश का निर्णय लेने से पहले कंपनी के fundamentals, valuation और जोखिमों का स्वतंत्र विश्लेषण करें।

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