ITC Share News बढ़े टैक्स के दबाव में ITC शेयर 52-वीक लो पर, निवेशकों की चिंता बढ़ी
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी ITC Limited के शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। कंपनी का शेयर करीब 3% टूटकर NSE पर ₹275.50 के नए 52-वीक लो स्तर तक पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सिगरेट कारोबार पर बढ़े टैक्स और भविष्य की कमाई को लेकर बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।
ब्रोकरेज हाउस Motilal Oswal Financial Services ने भी ITC को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। उनका मानना है कि GST 2.0 के तहत लागू किए गए नए टैक्स ढांचे का असर कंपनी के सबसे बड़े कारोबार यानी सिगरेट बिजनेस पर पड़ सकता है।
GST 2.0 के बाद सिगरेट कारोबार पर बढ़ा टैक्स बोझ
नई टैक्स व्यवस्था लागू होने के बाद ITC के सिगरेट कारोबार पर कुल टैक्स भार लगभग 60% से बढ़कर 65% तक पहुंच गया है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस अतिरिक्त टैक्स लागत की भरपाई करने के लिए कंपनी को अपने सिगरेट उत्पादों की कीमतों में लगभग 35% तक वृद्धि करनी पड़ सकती है।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2018 से 2025 के बीच सिगरेट उद्योग में टैक्स संरचना अपेक्षाकृत स्थिर रही थी। ऐसे में एक साथ इतनी बड़ी टैक्स वृद्धि पूरे उद्योग के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।
टैक्स लागू करने का तरीका भी रहा अलग
Motilal Oswal के अनुसार इस बार केवल टैक्स बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि इसे लागू करने की प्रक्रिया भी अलग रही।
क्या हुआ?
- 1 जनवरी 2026 को टैक्स बढ़ोतरी की घोषणा हुई।
- 1 फरवरी 2026 से नया टैक्स स्ट्रक्चर लागू हुआ।
- उद्योग को तैयारी के लिए लगभग एक महीने का समय मिला।
आमतौर पर सिगरेट पर टैक्स बढ़ने का असर तत्काल लागू होता है, इसलिए यह बदलाव असामान्य माना जा रहा है।

ITC ने क्यों नहीं बढ़ाईं एक साथ कीमतें?
बढ़े हुए टैक्स का पूरा बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने के बजाय ITC ने चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
कंपनी को आशंका है कि यदि एक बार में बहुत अधिक कीमत बढ़ाई गई तो ग्राहक
- सस्ती सिगरेट ब्रांड्स की ओर जा सकते हैं।
- अवैध (Illicit) सिगरेट बाजार का रुख कर सकते हैं।
- कानूनी सिगरेट बाजार की मांग प्रभावित हो सकती है।
इसी कारण ITC धीरे-धीरे MRP बढ़ाकर बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
ब्रोकरेज ने बताया दो चरणों वाला ट्रांजिशन
Motilal Oswal ने मौजूदा स्थिति को दो चरणों में बांटा है।
पहला चरण Transition Phase
इस दौरान
- कीमतों में क्रमिक वृद्धि होगी।
- बिक्री (Volume Growth) प्रभावित हो सकती है।
- ऑपरेटिंग मुनाफे (EBIT) में उतार-चढ़ाव रह सकता है।
- ग्राहकों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
दूसरा चरण Stabilization Phase
जब नई कीमतें पूरी तरह बाजार में स्वीकार हो जाएंगी, तब
- कानूनी और अवैध बाजार के बीच नया संतुलन बनेगा।
- वास्तविक मांग का आकलन संभव होगा।
- कंपनी की लाभप्रदता की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
बिक्री और मुनाफे पर पड़ सकता है असर
ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में ITC के सिगरेट कारोबार की बिक्री और ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर दबाव देखने को मिल सकता है।
विशेष रूप से:
- सिगरेट वॉल्यूम ग्रोथ कमजोर हो सकती है।
- EBIT मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं।
- आय (Earnings) अनुमानों में और कटौती संभव है।
- शेयर पर दबाव जारी रह सकता है।
हालांकि यह भी माना जा रहा है कि समय के साथ बाजार नई कीमतों के अनुसार खुद को समायोजित कर सकता है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल
वर्तमान समय में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि ग्राहक बढ़ी हुई कीमतों को कितनी आसानी से स्वीकार करते हैं।
