LIC Share सरकार की हिस्सेदारी बिक्री पर आया बड़ा अपडेट
LIC Share में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सरकार की हिस्सेदारी को लेकर अहम खबर सामने आई है। LIC के CEO आर. दोराईस्वामी ने कहा है कि फिलहाल कंपनी में सरकार की ओर से और हिस्सेदारी बेचने की उम्मीद नहीं है।
हालांकि, सरकार के पास अनिवार्य Public Shareholding की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मौजूद है। मुंबई में हुई बातचीत के दौरान CEO ने कहा कि फिलहाल LIC का फोकस लंबी अवधि के निवेश और कारोबार के विस्तार पर है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में सरकार LIC में अपनी हिस्सेदारी घटाने का फैसला अपने स्तर पर और लागू नियमों के अनुसार करेगी।
दोराईस्वामी के मुताबिक, निकट भविष्य में सरकार की ओर से LIC में और हिस्सेदारी बिक्री की उम्मीद नहीं है, लेकिन सरकार आगे तय प्रक्रिया और निर्देशों के अनुसार फैसला लेगी।
मई 2022 में हुई थी LIC की Listing
LIC की शेयर बाजार में मई 2022 में Listing हुई थी। IPO के दौरान सरकार ने कंपनी में अपनी करीब 3.5% हिस्सेदारी बेचकर शेयर बाजार में कंपनी को लिस्ट कराया था।
हालांकि, IPO के बाद भी भारत सरकार LIC की बहुमत हिस्सेदारी वाली सबसे बड़ी Shareholder बनी हुई है।
इसलिए सरकार की ओर से भविष्य में हिस्सेदारी बिक्री का कोई भी फैसला LIC के शेयर और कंपनी के Ownership Structure के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
LIC अपनी Equity Investments की लगातार करती है समीक्षा
LIC केवल अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने तक सीमित नहीं है। कंपनी अपनी Equity Investment Strategy के तहत अलग-अलग कंपनियों में किए गए निवेश की लगातार समीक्षा करती रहती है।
CEO आर. दोराईस्वामी के मुताबिक, LIC बाजार में उपलब्ध अवसरों और अपनी Cash Flow Requirements को देखते हुए किसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा या घटा सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी एक कंपनी को लेकर पहले से कोई निश्चित फैसला नहीं होता।
अगर बाजार में निवेश का अच्छा अवसर मिलता है और LIC की Cash Flow जरूरत इसकी अनुमति देती है, तो कंपनी किसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती है। वहीं, परिस्थितियों के अनुसार हिस्सेदारी कम करने का फैसला भी लिया जा सकता है।
LIC के Investment Decisions कैसे लिए जाते हैं?
दोराईस्वामी के अनुसार LIC के Investment Decisions मुख्य रूप से Regulatory Framework और Long-Term Value Creation के लक्ष्य को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
किसी कंपनी में LIC कितनी हिस्सेदारी रख सकती है, इसकी भी एक सीमा संबंधित नियमों के तहत तय होती है।
उन्होंने कहा कि चाहे कोई संस्था हो या कंपनी, LIC का उद्देश्य ऐसी जगह निवेश करना है जहां लंबी अवधि में Value Creation की संभावना हो।
इसी आधार पर ICICI Bank समेत किसी भी कंपनी में LIC की हिस्सेदारी को लेकर फैसला किया जाता है।
Private Equity और Credit में निवेश को लेकर क्या कहा?
LIC से जब Private Equity और Credit जैसी Alternative Asset Classes में निवेश की संभावनाओं के बारे में पूछा गया, तो CEO ने Policyholders के हित को प्राथमिकता बताया।
दोराईस्वामी के मुताबिक, LIC के लिए Policyholders का हित और उनके पैसे की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।
कंपनी Insurance Sector से जुड़े Regulatory Rules के तहत उपलब्ध अलग-अलग Investment Opportunities पर विचार करती है। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि Policyholders के Funds की Capital Safety बनी रहे और लंबी अवधि में अपेक्षित Return हासिल किया जा सके।
LIC Share Investors के लिए इसका क्या मतलब है?
सरकार की ओर से निकट भविष्य में LIC में अतिरिक्त हिस्सेदारी बिक्री की उम्मीद नहीं होने की बात निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे फिलहाल Government Stake Sale से जुड़ी संभावित Supply को लेकर स्पष्टता मिलती है।
हालांकि, LIC Share की कीमत पर असर केवल सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से तय नहीं होगा। कंपनी के Business Growth, Investment Performance, Profitability, Regulatory Changes और Market Conditions भी शेयर के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाएंगे।
