LIC Shareholding जून तिमाही में इन 10 शेयरों से ₹13,406 करोड़ की बिकवाली, जानिए पूरी लिस्ट
भारतीय शेयर बाजार में Life Insurance Corporation of India (LIC) सबसे बड़े घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII में शामिल है। LIC का पोर्टफोलियो काफी बड़ा है और इसकी निवेश गतिविधियों पर बाजार की नजर रहती है।
आमतौर पर LIC लंबे समय के नजरिए से कंपनियों में निवेश करती है। इसलिए जब देश की सबसे बड़ी घरेलू संस्थागत निवेशक किसी बड़ी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती या घटाती है, तो निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण Portfolio Activity बन जाती है।
जून तिमाही के दौरान भी LIC ने कई बड़ी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी में बदलाव किया। Prime Database के आंकड़ों के अनुसार, LIC ने अपने 10 बड़े शेयरों में कुल करीब ₹13,406 करोड़ की बिकवाली की। इस लिस्ट में Coal India और State Bank of India (SBI) सबसे ऊपर रहे।
Coal India में LIC की सबसे ज्यादा बिकवाली
जून तिमाही के दौरान LIC ने Coal India में सबसे ज्यादा शेयर बेचे।
LIC ने कंपनी के करीब 4.97 करोड़ शेयर बेचे, जिनकी कीमत लगभग ₹2,271 करोड़ बताई गई है।
इस बिकवाली के बाद Coal India में LIC की हिस्सेदारी कम हुई। कंपनी के पोर्टफोलियो में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Coal India एक प्रमुख PSU कंपनी है और LIC लंबे समय से इसमें एक बड़े संस्थागत निवेशक के रूप में मौजूद रही है।
SBI में ₹2,198 करोड़ की बिकवाली
LIC की बड़ी बिकवाली वाली कंपनियों में State Bank of India (SBI) भी शामिल रहा।
जून तिमाही के दौरान LIC ने SBI के करीब 2.15 करोड़ शेयर बेचे, जिनकी कीमत लगभग ₹2,198 करोड़ थी।
इस बिकवाली के बाद LIC के पास SBI के करीब 78.14 करोड़ शेयर बचे।
Hindustan Unilever में ₹1,681 करोड़ के शेयर बेचे
FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी Hindustan Unilever (HUL) में भी LIC ने अपनी हिस्सेदारी घटाई।
LIC ने करीब ₹1,681 करोड़ के शेयर बेचे। बिकवाली के बाद LIC के पास HUL के करीब 15.49 करोड़ शेयर बचे, जो कंपनी में लगभग 6.59% हिस्सेदारी के बराबर है।
Steel Authority of India में ₹1,497 करोड़ की बिकवाली
Steel Authority of India (SAIL) में LIC ने करीब ₹1,497 करोड़ के शेयर बेचे।
इस दौरान LIC ने कंपनी के लगभग 8.15 करोड़ शेयर बेचे। बिकवाली के बाद LIC के पास SAIL के करीब 24.27 करोड़ शेयर बचे।
Tata Steel में ₹1,415 करोड़ के शेयर बेचे
LIC ने Tata Steel में भी अपनी हिस्सेदारी कम की।
जून तिमाही में LIC ने Tata Steel के करीब 6.89 करोड़ शेयर बेचे, जिनकी कीमत लगभग ₹1,415 करोड़ थी।
इस बिकवाली के बाद LIC के पास Tata Steel के करीब 79.55 करोड़ शेयर बचे।
Bharat Forge में ₹977 करोड़ की बिकवाली
ऑटो और इंडस्ट्रियल सेक्टर की कंपनी Bharat Forge में भी LIC ने शेयर बेचे।
LIC ने करीब 50 लाख से ज्यादा शेयरों की बिकवाली की, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹977 करोड़ रही।
बिकवाली के बाद LIC के पास Bharat Forge के करीब 1.63 करोड़ शेयर बचे।
Tata Consumer Products में ₹905 करोड़ के शेयर बेचे
Tata Consumer Products में LIC ने लगभग ₹905 करोड़ की बिकवाली की।
LIC ने कंपनी के करीब 78 लाख से ज्यादा शेयर बेचे। इसके बाद उसके पास Tata Consumer Products के लगभग 8.15 करोड़ शेयर बचे।
ICICI Bank में ₹884 करोड़ की बिकवाली
बैंकिंग सेक्टर की प्रमुख कंपनी ICICI Bank में भी LIC ने अपनी हिस्सेदारी घटाई।
LIC ने करीब 68 लाख से ज्यादा शेयर बेचे, जिनकी कीमत लगभग ₹884 करोड़ थी।
इस बिकवाली के बाद LIC के पास ICICI Bank के करीब 31.18 करोड़ शेयर बचे।
Nestle India में ₹793 करोड़ के शेयर बेचे
FMCG कंपनी Nestle India में LIC ने करीब ₹793 करोड़ की बिकवाली की।
LIC ने कंपनी के 56 लाख से ज्यादा शेयर बेचे। इसके बाद LIC के पास Nestle India के करीब 11.28 करोड़ शेयर बचे।
ONGC में ₹785 करोड़ की बिकवाली
ONGC भी LIC की बिकवाली वाली कंपनियों में शामिल रही।
जून तिमाही के दौरान LIC ने ONGC के करीब 2.88 करोड़ शेयर बेचे, जिनकी कीमत लगभग ₹785 करोड़ थी।
बिकवाली के बाद LIC के पास ONGC के करीब 125.21 करोड़ शेयर बचे।
LIC Portfolio में क्या बदलाव दिखा?
जून तिमाही के आंकड़ों से पता चलता है कि LIC ने अपने कई बड़े और प्रमुख शेयरों में हिस्सेदारी घटाई है।
सबसे बड़ी बिकवाली वाली 10 कंपनियां
| कंपनी | अनुमानित बिकवाली | बेचे गए शेयर |
|---|---|---|
| Coal India | ₹2,271 करोड़ | 4.97 करोड़ |
| SBI | ₹2,198 करोड़ | 2.15 करोड़ |
| Hindustan Unilever | ₹1,681 करोड़ | — |
| SAIL | ₹1,497 करोड़ | 8.15 करोड़ |
| Tata Steel | ₹1,415 करोड़ | 6.89 करोड़ |
| Bharat Forge | ₹977 करोड़ | 50 लाख+ |
| Tata Consumer Products | ₹905 करोड़ | 78 लाख+ |
| ICICI Bank | ₹884 करोड़ | 68 लाख+ |
| Nestle India | ₹793 करोड़ | 56 लाख+ |
| ONGC | ₹785 करोड़ | 2.88 करोड़ |
इन 10 कंपनियों में LIC की कुल बिकवाली करीब ₹13,406 करोड़ रही।
निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?
LIC जैसी बड़ी संस्थागत निवेशक की खरीदारी या बिकवाली को बाजार में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसे अकेले किसी शेयर की तेजी या गिरावट का आधार नहीं माना जाना चाहिए।
LIC कई कारणों से अपने Portfolio में बदलाव कर सकती है—जैसे Valuation, Portfolio Rebalancing, Profit Booking, Liquidity Requirements या निवेश रणनीति में बदलाव।
इसलिए किसी कंपनी में LIC की हिस्सेदारी घटने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि कंपनी के Fundamental कमजोर हो गए हैं।
