मार्केट खुलते ही असर दिखा सकते हैं ये 5 बड़े फैक्टर्स
मार्केट के दोबारा खुलने के बाद निवेशकों की नजर कुछ अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहने वाली है। हालिया भू-राजनीतिक घटनाएं, विदेशी निवेशकों की चाल और बड़े आर्थिक आंकड़े आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
1. कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी
हाल की भू-राजनीतिक घटनाओं के चलते वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तेल एक्सपोर्ट पर दबाव बढ़ाने और कुछ अफ्रीकी क्षेत्रों में सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के कारण सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
- ब्रेंट क्रूड 0.4% की तेजी के साथ 62.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से
- महंगाई
- कंपनियों की लागत
- और कॉर्पोरेट मार्जिन
पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
2. डॉलर-रुपया की चाल पर रहेगी नजर
अमेरिकी डॉलर भारतीय रुपये के मुकाबले थोड़ा कमजोर हुआ है और फिलहाल 89.75 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो हाल के उच्च स्तरों से कुछ नीचे है।
इस कमजोरी के पीछे
- विदेशी मुद्रा आउटफ्लो में कमी
- छुट्टियों के कारण कम ट्रेडिंग गतिविधि
मुख्य कारण रहे।

हालांकि शॉर्ट टर्म में रुपया स्थिर दिख रहा है, लेकिन डॉलर का लॉन्ग-टर्म ट्रेंड अभी भी पॉजिटिव माना जा रहा है, यानी आने वाले समय में इसमें धीरे-धीरे मजबूती देखने को मिल सकती है।
3. FII की भारी बिकवाली बनी चिंता का कारण
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली इस समय बाजार के लिए सबसे बड़ा नेगेटिव फैक्टर बनी हुई है।
- 27 दिसंबर तक FII ने
₹22,130 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे - वहीं 2025 में अब तक
कुल बिकवाली ₹2,31,990 करोड़ तक पहुंच चुकी है
ऐसे में आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर FII के फ्लो पर टिकी रहेगी, क्योंकि यही बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
4. अमेरिका से आने वाले अहम आर्थिक संकेत
इस हफ्ते वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक अपडेट्स पर रहेगी।
इनमें शामिल हैं
- FOMC Meeting Minutes
→ जिससे भविष्य में ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं - Federal Reserve Balance Sheet Update
→ जो लिक्विडिटी और मौद्रिक नीति की दिशा को दर्शाता है
इन आंकड़ों का असर सीधे तौर पर
- डॉलर
- बॉन्ड यील्ड
- और उभरते बाजारों (Emerging Markets)
पर देखने को मिल सकता है।
5. भारत के अहम मैक्रो इकोनॉमिक डेटा
घरेलू मोर्चे पर भी निवेशकों के लिए यह हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। भारत से आने वाले कुछ प्रमुख आर्थिक आंकड़े बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
इनमें शामिल हैं:
- नवंबर का Industrial Production (IIP) डेटा
- सरकारी बजट से जुड़े अपडेट्स
- भारत के External Debt से संबंधित आंकड़े
- HSBC Manufacturing PMI की Final Report
ये आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती का साफ संकेत देंगे।
निष्कर्ष
मार्केट खुलते ही निवेशकों को ग्लोबल संकेतों और घरेलू डेटा दोनों पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर-रुपया की चाल, FII की गतिविधियां और अमेरिका व भारत से आने वाले आर्थिक आंकड़े मिलकर आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। ऐसे माहौल में सतर्कता और डिसिप्लिन ही सबसे बेहतर रणनीति है
