हाल ही में कई भारतीय Mutual Fund Houses ने सरकारी कंपनियों (Public Sector Undertakings – PSUs) के बोर्ड में Politically Exposed Persons (PEPs) यानी राजनीति से जुड़े लोगों की नियुक्तियों पर गंभीर आपत्ति जताई है।
Moneycontrol की एक रिपोर्ट के अनुसार, Axis Mutual Fund, UTI, DSP, Sundaram Mutual Fund और Union Mutual Fund ने बीते कुछ महीनों में की गई बोर्ड नियुक्तियों में विरोध दर्ज किया है।
Mutual Funds का तर्क राजनीतिक प्रभाव से Corporate Governance प्रभावित होने का खतरा
इन फंड हाउस का कहना है कि
- राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की नियुक्ति से कंपनी के रणनीतिक और परिचालन फैसलों में बाहरी दबाव आ सकता है।
- इससे management का ध्यान अपने व्यावसायिक लक्ष्यों से हट सकता है।
- निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता कम हो सकती है।
- कई बार शेयरधारकों को उम्मीदवार की राजनीतिक संबद्धता से जुड़ी पूरी जानकारी नहीं दी जाती।
दूसरे शब्दों में, Mutual Funds मानते हैं कि बोर्ड में राजनीतिक हस्तक्षेप कंपनी के Corporate Governance Framework को कमजोर कर सकता है।
कुछ बड़े Fund Houses ने राजनीतिक नियुक्तियों का समर्थन भी किया
इसके विपरीत, कई अग्रणी म्यूचुअल फंड कंपनियों ने इन नियुक्तियों का समर्थन किया है, जिनमें शामिल हैं:

- HDFC Mutual Fund
- SBI Mutual Fund
- ICICI Prudential Mutual Fund
- Kotak Mahindra Mutual Fund
- Nippon India Mutual Fund
इन फंडों का तर्क है कि
“बोर्ड में विभिन्न सामाजिक और नीतिगत पृष्ठभूमि वाले लोग होना कंपनी के लिए लाभदायक हो सकता है।
यह निर्णय लेने की प्रक्रिया में विविध दृष्टि और अनुभव जोड़ता है।”
किन-किन PSU कंपनियों में हुआ विरोध?
30 सितंबर 2025 को समाप्त तिमाही में कई बड़ी सरकारी कंपनियों में बोर्ड नियुक्तियों पर आपत्ति देखने को मिली, जैसे:
| कंपनी का नाम | बोर्ड नियुक्ति पर विवाद |
|---|---|
| ONGC | Director-level appointment |
| Coal India | Independent / Nominee appointment |
| NTPC | Board restructuring proposals |
| Bharat Petroleum (BPCL) | Independent Director Reappointment |
| RailTel | Director-level nomination |
| Chennai Petroleum | Board nominee appointment |
| Mangalore Refinery | Governance-related nomination |
यह ट्रेंड बताता है कि PEP नियुक्तियां बड़े और छोटे दोनों PSUs में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन रही हैं।
BPCL में Gopal Krishna Agarwal की Reappointment पर मतभेद
अगस्त 2025 में BPCL ने Gopal Krishna Agarwal को Independent Director के रूप में दूसरी बार नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा।
वे:
- नीति एवं गवर्नेंस मामलों में लंबे समय से सक्रिय हैं,
- Indian Institute of Corporate Affairs के बोर्ड का हिस्सा रहे हैं,
- और BJP के National Spokesperson भी हैं।
Union Mutual Fund सहित कई फंड हाउसों ने उनकी नियुक्ति का विरोध किया, यह कहते हुए कि:
उनकी राजनीतिक भूमिका कंपनी के निर्णयों को प्रभावित कर सकती है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
Sundaram Mutual Fund ने BHEL में नियुक्ति का विरोध क्यों किया?
BHEL ने Ashish Chaturvedi को बोर्ड में शामिल करने का प्रस्ताव रखा था।
Sundaram Mutual Fund ने इस नियुक्ति का विरोध किया और अपनी voting disclosure में लिखा:
“आशीष चतुर्वेदी का कॉर्पोरेट अनुभव एक वर्ष से कम है और सार्वजनिक जानकारी से पता चलता है कि उनका राजनीतिक जुड़ाव है। इस कारण बोर्ड के निर्णयों पर राजनीतिक प्रभाव पड़ने की आशंका है।”
निष्कर्ष
सरकारी कंपनियों में राजनीतिक नियुक्तियों का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और निवेशकों के विश्वास से जुड़ गया है।
जहां कुछ संस्थान इसे विविध अनुभव की दृष्टि से सही ठहराते हैं, वहीं कई Mutual Funds मानते हैं कि इससे निर्णय प्रक्रिया में निष्पक्षता और पेशेवर संतुलन कमजोर हो सकता है।
