Rajasthan Police ने Alwar में Cyber Fraud Racket का भंडाफोड़ किया

1) क्या हुआ — केस का सार

Rajasthan Police ने Alwar में एक बड़े Cyber Fraud Racket का खुलासा किया है। इस रैकेट का मुख्य काम Mule Accounts (नकली/मायावी बैंक खाते) बनाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचना था। इन खातों के माध्यम से ठगी से आए पैसों को देशभर में ट्रांसफर करके “धोया” और “खपा” जाता था। पुलिस ने रविवार को छापेमारी में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया; फिलहाल इस मामले में कुल 16 गिरफ्ततियाँ दर्ज की जा चुकी हैं।


2) छापेमारी में क्या मिला — मिलते सबूत और सामान

पुलिस ने तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • 26 ATM कार्ड
  • 33 मोबाइल फोन
  • 34 SIM कार्ड
  • ₹2.5 लाख नकद
  • चेक बुक, पासबुक
  • 2 कारें

ये सामग्री रैकेट की कार्यप्रणाली और लेन-देन के पैमाने की पुष्टि करती है।


3) रैकेट की कार्यप्रणाली — खाते कैसे बनते और इस्तेमाल कैसे होते थे

जांच में पता चला कि यह गिरोह WhatsApp और Telegram ग्रुप्स के माध्यम से सैकड़ों Current और Corporate Accounts बेचता था। अकाउंट्स आमतौर पर फर्जी दस्तावेज़ों से खोले जाते थे, फिर उन्हें नए मोबाइल नंबर और स्पेशल APK फाइल्स के साथ लिंक कर दिया जाता था — जिससे अपराधियों को Internet Banking तक पहुँच मिल जाती थी।

इन Mule Accounts का उपयोग मुख्यतः निम्न के लिए होता था

  • Online betting और gaming scams से अर्जित धन का प्रबंधन/हवाला
  • Crypto ट्रांज़ैक्शनों से निकले पैसों का ट्रांसफर और छुपाना
  • अन्य ऑनलाइन ठगी के धन का रूटिंग और कन्फ्यूज़न फैलाना

4) गिरोह के मास्टरमाइंड और बैंक कनेक्शन

जांच में दो प्रमुख मास्टरमाइंड के नाम सामने आए हैं:

  • Varun Patwa (40) — मूल रूप से Udaipur, अब Gurugram में रह रहा था।
  • Satish Kumar Jat (35) — Haryana, Hisar निवासी।

इसके अलावा Axis Bank के 4 कर्मचारी भी गिरफ्तार हुए हैं

  • Sahil Agrawal (33)
  • Gulshan Punjabi (33)
  • Aasu Sharma (23)
  • Anchal Jat (24)

पुलिस के अनुसार ये बैंक कर्मचारी फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर नकली Current Accounts खोलते और उन्हें मध्यस्थों (middlemen) के जरिये अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। बैंक कर्मचारियों की भागीदारी ने रैकेट को बड़े पैमाने पर ऑपरेट करने योग्य नेटवर्क दे दिया था।


5) पैमाना — यह छोटा घोटाला नहीं है

जांच से जो आंकड़े मिले हैं वे बहुत गंभीर हैं:

  • Mule Accounts के माध्यम से ₹500 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ।
  • National Cybercrime Reporting Portal (NCRP) पर इस रैकेट से जुड़े 4,000+ शिकायतें दर्ज हैं।
  • अब तक बरामदियों व ट्रेस के आधार पर ₹100 करोड़ से अधिक की ठगी सीधे इस रैकेट से जुड़ी पाई गई है।

ये संख्या दिखाती है कि यह ऑपरेशन व्यापक और संगठित था — स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं।


6) Mule Accounts कितनी खतरनाक चीज़ हैं?

Mule Accounts साइबर क्राइम की दुनिया में सबसे खतरनाक उपकरणों में गिने जाते हैं क्योंकि:

  • वे चोरी किए गए पैसों को अस्थायी तौर पर घुमाने में मदद करते हैं, जिससे ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है।
  • जब बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता जुड़ जाती है, तो स्कैम करने वालों के लिए भरोसेमंद और बड़े-पैमाने पर खातों का नेटवर्क तैयार हो जाता है।
  • इससे अपराध की श्रंखला लंबे समय तक और बड़े स्तर पर चल सकती है — जो रिकवरी और प्रोसेक्यूशन को प्रभावित करता है।

7) क्या सिखने योग्य बातें और आगे की कार्रवाई?

  • बैंकिंग सेक्टर में Know Your Customer (KYC) और डोक्युमेंट वेरिफिकेशन और सख़्त करने की ज़रूरत है।
  • डिपॉजिटरीज और बैंक कर्मचारियों की निगरानी/ऑडिट बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि अंदरूनी संलिप्तता पकड़ी जा सके।
  • उपयोगकर्ताओं (सामान्य जनता) को भी सावधान रहना चाहिए — किसी अजनबी को अपने बैंक डॉक्यूमेंट न दें और अनधिकृत ऐप/APK इंस्टॉल न करें।
  • स्थानीय और राष्ट्रीय साइबर पुलिस टैस्क-फोर्सेज़ को सहयोग और शिकायत रजिस्ट्रेशन (NCRP) को तेजी से मॉनिटर करना चाहिए।

निष्कर्ष

Alwar में पकड़ा गया यह रैकेट यह दिखाता है कि आज के डिजिटल दौर में बैंकिंग-सिस्टम से जुड़ी कमजोरियाँ और अंदरूनी संलिप्तता कैसे बड़े साइबर फ्रॉड को जनम दे सकती हैं। मजबूती से लागू की गई KYC नीतियों, बैंकिंग ऑडिट और नागरिक सतर्कता से ही ऐसे नेटवर्क को छोटा किया जा सकता है।

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