RBI Rate Cut
ओमनीसाइंस कैपिटल के CEO एवं Chief Investment Strategist विकास वी गुप्ता का कहना है कि भारत में मुद्रास्फीति में नरमी और अर्थव्यवस्था की वृद्धि को गति देने की आवश्यकता को देखते हुए, RBI अक्टूबर-दिसंबर 2025 की बैठकों में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
लेकिन इसका नकारात्मक असर रुपये पर पड़ सकता है, जिससे रुपये की वैल्यू में गिरावट की संभावना बनी रहेगी।
India-US Trade Deal और H1-B Visa शुल्क
गुप्ता के अनुसार, H1-B वीज़ा शुल्क पर बातचीत की वजह से India-US ट्रेड एग्रीमेंट में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है।
हालांकि, यदि टैरिफ रिलीफ मिलता है, तो मार्केट सेंटिमेंट में सुधार देखा जा सकता है।

Auto Sector का Valuation
- अन्य सेक्टर्स की तुलना में ऑटो सेक्टर 28-30 के P/E रेशियो पर बहुत ज़्यादा ओवरवैल्यूड नहीं है।
- हालांकि, इसकी ग्रोथ रेट नॉमिनल GDP से धीमी है।
- सिंगल-डिजिट ग्रोथ के लिए लगभग 30 का P/E महंगा माना जाएगा।
- ईवी (EVs) और नए प्रोडक्ट लॉन्च रेवेन्यू व अर्निंग्स को बढ़ा सकते हैं, लेकिन फेयर वैल्यूएशन पर निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
GDP Growth की उम्मीद
इनकम टैक्स स्लैब, GST सुधार और RBI की संभावित रेट कट से घरेलू कंज्यूमर डिमांड में तेजी आ सकती है।
इससे GDP ग्रोथ रेट में सुधार की संभावना जताई गई है।
15% Earnings Growth क्यों मुश्किल
हालांकि, 10-12% GDP ग्रोथ रेट की संभावना अभी भी बनी हुई है।
रुपये की गिरावट से RBI के लिए रेट कट आसान नहीं होगा।
India-US ट्रेड डील और H1-B वीज़ा इश्यू से आईटी सेक्टर पर असर पड़ेगा।
ऑयल & गैस तथा मेटल & माइनिंग सेक्टर की अर्निंग्स का अनुमान लगाना कठिन है।
चूंकि आईटी सेक्टर, ऑयल-गैस और माइनिंग का Nifty 50 में बड़ा योगदान है, इसलिए 15% earnings growth पाना चुनौतीपूर्ण होगा।
