FY26 में 87.7% F&O ट्रेडर्स को हुआ नुकसान, SEBI की स्टडी से सामने आई ये बड़ी बातें
शेयर बाजार में Futures & Options यानी F&O Trading की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है, लेकिन इससे लगातार मुनाफा कमाना अब भी ज्यादातर Retail Traders के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। SEBI की FY26 से जुड़ी स्टडी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में 87.7% Individual F&O Traders को नुकसान हुआ और व्यक्तिगत ट्रेडर्स का कुल नुकसान करीब ₹91,685 करोड़ रहा।
दिलचस्प बात यह है कि बाजार में सक्रिय ट्रेडर्स की संख्या एक साल में करीब 18% कम हुई, लेकिन जो लोग ट्रेडिंग में बने रहे, उनका औसत नुकसान बढ़ गया। स्टडी से यह भी पता चलता है कि F&O Trading अब बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही है और छोटे शहरों में भी इसकी पहुंच तेजी से बढ़ी है।
F&O Traders की संख्या घटी, लेकिन औसत नुकसान बढ़ा
FY25 में एक Individual F&O Trader का औसत नुकसान करीब ₹1.13 लाख था। FY26 में यह बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख हो गया।
यानी ट्रेडर्स की संख्या कम होने के बावजूद बचे हुए ट्रेडर्स के लिए F&O Trading से पैसा कमाना आसान नहीं हुआ।
FY25 में करीब 1.062 करोड़ Active Traders थे, जो FY26 में घटकर लगभग 87.5 लाख रह गए। इस आंकड़े में Retail Investors के साथ HNI, HUF और NRI जैसे Individual Participants भी शामिल हैं।
नए ट्रेडर्स की संख्या में बड़ी गिरावट
F&O Market में नए लोगों की एंट्री भी धीमी हुई है।
- FY25 में नए ट्रेडर्स 34.3 लाख
- FY26 में नए ट्रेडर्स 20.8 लाख
वहीं करीब 46 लाख ट्रेडर्स ऐसे रहे जो FY26 के दौरान बाजार से बाहर हो गए और वापस नहीं लौटे।
बाजार से निकलने वालों में छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले ट्रेडर्स की संख्या ज्यादा रही। खासकर जिनका सालाना कारोबार ₹10,000 से कम था, उनकी भागीदारी में ज्यादा कमी देखी गई।
कुल नुकसान ₹1 लाख करोड़ से नीचे आया
ट्रेडर्स की संख्या घटने के साथ कुल नुकसान भी कम हुआ।
FY25 में Individual Traders का संशोधित कुल नुकसान करीब ₹1.12 लाख करोड़ था, जो FY26 में घटकर ₹91,685 करोड़ रह गया।
हालांकि, ट्रेडर्स की संख्या में लगभग 18% की गिरावट के बावजूद कुल नुकसान में भी करीब 18% की ही कमी आई। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार से बाहर निकलने वाले कई छोटे ट्रेडर्स के बावजूद सक्रिय ट्रेडर्स के बीच नुकसान की समस्या बनी रही।
Options Trading बनी सबसे बड़ी चुनौती
FY26 में Individual Traders के कुल F&O नुकसान का करीब 92% हिस्सा Options Trading से आया।
Options में ट्रेडर किसी Stock या Index को एक तय कीमत पर खरीदने या बेचने का अधिकार हासिल करता है। इसमें कम समय में बड़े price movements से मुनाफे का अवसर मिल सकता है, लेकिन तेजी से बदलती कीमतों के कारण नुकसान का जोखिम भी काफी बढ़ सकता है।
FY26 में:
- 99.3% Individual Traders ने कम से कम एक बार Options में ट्रेड किया।
- करीब 93% Traders ने केवल Options में कारोबार किया।
- सिर्फ करीब 6.6% Individual Traders ने Futures में ट्रेड किया।
नुकसान की दर भी अलग रही। Options में करीब 87.7% Traders को नुकसान हुआ, जबकि Futures में नुकसान उठाने वाले Traders की हिस्सेदारी करीब 66% रही।
नुकसान उठाने वालों का औसत घाटा ज्यादा
SEBI के आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण अंतर सामने आया।
नुकसान उठाने वाले Traders का औसत घाटा करीब ₹1.47 लाख रहा, जबकि मुनाफा कमाने वाले Traders का औसत लाभ लगभग ₹1.22 लाख था।
यानी नुकसान उठाने वाले Traders का औसत घाटा, मुनाफा कमाने वाले Traders के औसत लाभ से करीब 21% अधिक रहा।
स्टडी के अनुसार करीब 23% Traders ने Individual Traders के कुल नुकसान का लगभग 90% हिस्सा उठाया।
यह दिखाता है कि कुछ बड़े नुकसान कई सफल Trades के मुनाफे को भी खत्म कर सकते हैं।
युवा Traders की हिस्सेदारी बढ़ी
F&O Trading में युवा निवेशकों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है।
FY22 में 30 साल से कम उम्र के Traders Individual Participants का करीब 31% थे। FY26 में यह हिस्सेदारी बढ़कर 43% हो गई।
लेकिन युवा Traders के बीच नुकसान की दर भी काफी अधिक रही। 30 साल से कम उम्र के करीब 89% Traders को नुकसान हुआ।
इससे यह बात सामने आती है कि बाजार में जल्दी प्रवेश करना और लगातार मुनाफा कमाना दो अलग-अलग बातें हैं।
कम आय वाले Traders पर भी बड़ा असर
SEBI के आंकड़ों के मुताबिक करीब तीन-चौथाई Individual Traders की सालाना आय ₹5 लाख से कम थी।
इन Traders ने कुल F&O कारोबार का करीब 43% हिस्सा किया, लेकिन कुल नुकसान में उनकी हिस्सेदारी करीब 53% रही।
इसका मतलब है कि कम आय वाले Traders की F&O Market में भागीदारी उनके लिए अपेक्षाकृत बड़ा financial risk बन सकती है।
F&O Trading छोटे शहरों तक पहुंची
F&O Trading अब केवल Mumbai, Delhi और Bengaluru जैसे बड़े Financial Centres तक सीमित नहीं रही है।
Top 30 Cities के बाहर रहने वाले Traders अब Individual Participants का करीब दो-तिहाई हिस्सा हैं। इन शहरों के बाहर रहने वाले Traders का कुल कारोबार में हिस्सा भी लगभग आधा है।
Online Trading Platforms, Smartphones और आसान Digital Access ने छोटे शहरों और कस्बों के लोगों के लिए Stock Market Trading को काफी accessible बना दिया है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है:
Market तक पहुंच आसान होना और लगातार पैसा कमाना एक ही बात नहीं है।
Professional Traders का प्रदर्शन अलग रहा
Individual Traders की तुलना में Institutional और Professional Trading Participants का प्रदर्शन काफी अलग रहा।
FY26 में
- Proprietary Trading Firms ने करीब ₹44,000 करोड़ का Gross Profit कमाया।
- FPI ने करीब ₹14,000 करोड़ का लाभ कमाया।
- Corporates ने करीब ₹8,000 करोड़ का लाभ कमाया।
- Mutual Funds और LLPs ने करीब ₹3,000 करोड़ का लाभ कमाया।
इससे Retail और Professional Trading के बीच रणनीति, technology और execution में अंतर भी सामने आता है।
Algorithmic Trading ने बड़ा अंतर बनाया
SEBI की स्टडी के अनुसार, FPI और Proprietary Trading Desks के मुनाफे का करीब 99% हिस्सा Algorithmic Trading से आया।
Algorithmic Trading में computer-based systems पहले से तय rules और strategies के आधार पर trades execute करते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि algorithmic trading में नुकसान का जोखिम खत्म हो जाता है। लेकिन बड़े professional players के पास technology, data, risk-management systems और execution infrastructure जैसे अतिरिक्त resources होते हैं।
ज्यादा Trading का मतलब ज्यादा Profit नहीं
SEBI की स्टडी का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष Trading Frequency से जुड़ा है।
आंकड़ों में पाया गया कि जिन Traders ने ज्यादा बार Trading की, उनमें नुकसान की दर भी ज्यादा रही। यह प्रभाव खास तौर पर युवा, कम आय वाले और Small-Cap Stock Portfolio रखने वाले Traders में ज्यादा दिखाई दिया।
यानी सिर्फ ज्यादा trades करना या पूरे दिन market में active रहना profitability की गारंटी नहीं देता।
Option Buying सबसे आम Strategy रही
Retail F&O Trading में Option Buying सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली strategy रही।
करीब 97% Traders ने किसी न किसी रूप में Option Buying की, जबकि करीब 2% Traders मुख्य रूप से Option Sellers थे।
Options में कम premium के साथ बड़ा exposure मिलने के कारण यह strategy आकर्षक लग सकती है, लेकिन time decay, volatility और तेज price movement के कारण risk भी काफी बढ़ सकता है।
ज्यादा अनुभव से भी नुकसान खत्म नहीं हुआ
सिर्फ बाजार में ज्यादा समय बिताने से भी Trading Results बेहतर नहीं हुए।
SEBI के आंकड़ों के मुताबिक experienced Traders में भी नुकसान की दर ऊंची रही। यानी Experience जरूरी है, लेकिन अकेले experience से profitable trading की guarantee नहीं मिलती।
और लगातार नुकसान का pattern भी चिंताजनक रहा। करीब 90% ऐसे Traders, जिन्हें लगातार दो वर्षों तक नुकसान हुआ और जिन्होंने अगले वर्ष भी trading जारी रखी, उन्हें तीसरे वर्ष भी नुकसान हुआ।
अधिकांश Traders की तिमाहियां घाटे में रहीं
करीब 85% Traders की quarterly trading का परिणाम घाटे में रहा।
इससे संकेत मिलता है कि पूरे साल का नुकसान केवल कुछ खराब Trades का नतीजा नहीं था। कई Traders को साल की अधिकांश तिमाहियों में Trading से नुकसान हुआ।
जिन Traders के कुछ quarters profitable और कुछ loss-making रहे, उनमें भी करीब 79% Traders ने profitable quarters में जितना कमाया, उससे ज्यादा loss-making quarters में गंवाया।
यही कारण है कि एक-दो सफल Trades या कुछ profitable months को देखकर किसी Trading Strategy को लगातार सफल मानना सही नहीं है।
Retail F&O Traders के लिए सबसे बड़ी सीख
SEBI की स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यह है कि F&O Trading में participation बढ़ना और profitability बढ़ना दो अलग-अलग चीजें हैं।
अगर कोई Trader F&O Market में सक्रिय है, तो केवल entry और exit पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। Risk Management, Position Sizing, Trading Frequency और Loss Control भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
खासकर Options Trading में तेज returns की संभावना के साथ तेज losses का जोखिम भी मौजूद रहता है। इसलिए बिना समझे लगातार trades करना या नुकसान की भरपाई के लिए position size बढ़ाना जोखिम को और बढ़ा सकता है।
