Gold Price Discovery को मजबूत करने पर SEBI का फोकस

SEBI का Gold Price Discovery को मजबूत करने पर बड़ा फोकस

भारतीय Commodity Market को और अधिक मजबूत व पारदर्शी बनाने की दिशा में SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने एक अहम कदम उठाया है। सेबी अब उन कारणों की गहराई से जांच करेगा, जिनकी वजह से Electronic Gold Receipt (EGR) अब तक भारत में Gold Price Discovery के लिए एक प्रभावी और व्यापक रूप से स्वीकार्य Benchmark नहीं बन पाया है।

यह पहल सेबी की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत Commodity Market Ecosystem को मजबूत करना और विभिन्न सेगमेंट्स में Participation व Liquidity बढ़ाना प्राथमिक लक्ष्य है।


Electronic Gold Receipt (EGR) क्या है?

Electronic Gold Receipt (EGR) एक डिजिटल इंस्ट्रूमेंट है, जो Physical Gold का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी ट्रेडिंग देश के Stock Exchanges पर होती है और इसे एक National Spot Market for Gold के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से पेश किया गया है।

EGR के माध्यम से निवेशक Physical Gold को Demat Form में खरीद और बेच सकते हैं। यह पूरा सिस्टम SEBI Regulated है, जिससे Market में Transparency, Safety और Trust सुनिश्चित होता है। इसका मकसद Gold Trading को अधिक Organized और Efficient बनाना है।


EGR की स्वीकार्यता में आ रही चुनौतियों पर सेबी की नजर

SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey के अनुसार, रेगुलेटर उन Structural, Operational और Regulatory Challenges का गहन विश्लेषण कर रहा है, जो EGR की व्यापक स्वीकार्यता में बाधा बन रहे हैं।

Market Participants का मानना है कि GST से जुड़े मुद्दे EGR की Liquidity और बड़े स्तर पर Adoption को प्रभावित कर रहे हैं। यदि भारत में Gold Price Discovery में EGR को एक अहम भूमिका निभानी है, तो इन व्यावहारिक और टैक्स से जुड़े मसलों का समाधान बेहद जरूरी है।


2021 में EGR को मिली थी Securities की मान्यता

सेबी चेयरमैन ने यह जानकारी Commodity Participants Association of India (CPAI) के एक कार्यक्रम के दौरान साझा की। सरकार ने दिसंबर 2021 में EGR को आधिकारिक रूप से Securities का दर्जा दिया था, जिससे इसकी कानूनी मान्यता स्थापित हुई।

इसके बाद 10 जनवरी 2022 को सेबी ने Gold Exchange Ecosystem को लेकर एक विस्तृत सर्कुलर जारी किया। इसमें Vaulting Standards, EGR Creation और Redemption Process, Intermediaries की भूमिका तथा Risk Management Framework जैसे महत्वपूर्ण नियम शामिल किए गए।


Commodity Market Expansion सेबी की Top Priority

इन तमाम प्रयासों के बावजूद, फिलहाल EGR में Market Activity सीमित बनी हुई है। इसी कारण से सेबी अब दोबारा उन Practical Issues पर फोकस कर रहा है, जो Participation और Liquidity को प्रभावित कर रहे हैं।

Tuhin Kanta Pandey ने स्पष्ट रूप से कहा कि Commodity Market का विस्तार सेबी की Top Priority में शामिल है। इसी दिशा में रेगुलेटर ने दो Working Groups का गठन किया है।

  • पहला Working Group Exchanges, Brokers और अन्य Market Participants की चुनौतियों पर काम करेगा।
  • इसका उद्देश्य Ground-Level समस्याओं की पहचान कर उन्हें दूर करना है।

निष्कर्ष

SEBI की यह पहल भारत में Gold Market को अधिक मजबूत, पारदर्शी और Global Standards के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि EGR से जुड़ी मौजूदा समस्याओं का समाधान हो जाता है, तो यह भारत में Gold Price Discovery का एक भरोसेमंद Benchmark बन सकता है।

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