Share Market Today Crude Oil $100 के पार, Middle East Tension से Sensex 813 अंक टूटा
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और Middle East में बढ़ते तनाव ने भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र गिरावट दर्ज की गई।
Sensex 813 अंक से ज्यादा टूटकर 74,764 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 204 अंक गिरकर 23,431 पर आ गया। इस गिरावट के बीच BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल market capitalization भी ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा घटकर करीब ₹484 लाख करोड़ रह गया।
बाजार में बिकवाली व्यापक रही, लेकिन सबसे ज्यादा दबाव IT stocks में देखने को मिला।
IT Stocks में भारी बिकवाली
Sensex के प्रमुख शेयरों में Infosys, HCL Tech, Tech Mahindra और TCS करीब 2-5% तक गिर गए। वहीं Hindustan Unilever और HDFC Bank में भी करीब 2% की कमजोरी रही।
दूसरी तरफ कुछ शेयरों ने बाजार की गिरावट के बीच मजबूती दिखाई। Adani Ports करीब 4% चढ़ा, जबकि Tata Steel में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई।
Sectoral performance की बात करें तो Nifty IT Index 3% से ज्यादा गिरा, जिसने Nifty पर भी खासा दबाव बनाया।
Middle East Tension ने बढ़ाई चिंता
Middle East में बढ़ते सैन्य तनाव ने Global Markets के लिए चिंता बढ़ा दी है।
मंगलवार को Yemen में Iran समर्थित Houthi समूह की ओर से Saudi Arabia के कई शहरों पर हमले की खबर सामने आई। इससे यह आशंका बढ़ी कि अमेरिका के सहयोगी देश भी इस संघर्ष में और गहराई से शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा अमेरिकी सेना की ओर से Iran के कई oil tankers को निशाना बनाए जाने और Iran की ओर से Jordan में अमेरिकी military base पर हमले की खबरों ने तनाव और बढ़ा दिया।
Iran के सरकारी मीडिया के मुताबिक, Iranian Revolutionary Guards ने Gulf में दो अमेरिकी जहाजों और आठ oil tankers पर हमला किया है। इन जहाजों को Strait of Hormuz के उस हिस्से से गुजरने की कोशिश करते समय निशाना बनाए जाने की बात कही गई, जिसे Iran ने unsafe zone बताया है।
Hormuz Strait पर नजर क्यों?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण oil shipping routes में से एक है। इस रास्ते पर लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित होने से Global Oil Supply पर दबाव बढ़ सकता है।
यही वजह है कि Middle East में तनाव बढ़ने के साथ ही Crude Oil की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
अगर Hormuz Strait में लंबे समय तक shipping disruption रहता है, तो इसका असर सिर्फ Oil Prices तक सीमित नहीं रहेगा। महंगा crude Global Inflation, transportation cost और कंपनियों की input cost को भी प्रभावित कर सकता है।
Crude Oil फिर पहुंचा $100 के पार
Middle East में संघर्ष बढ़ने के बीच Crude Oil की कीमत $100 प्रति barrel के पार पहुंच गई है।
साल की शुरुआत में भीषण संघर्ष के दौरान Oil Price करीब $130 प्रति barrel तक पहुंच गई थी। बाद में ceasefire और बातचीत की उम्मीद बढ़ने पर कीमतें $90 से नीचे आ गई थीं।
अब संघर्ष दोबारा बढ़ने से Oil Supply को लेकर नई चिंता पैदा हुई है। खास तौर पर Hormuz Strait में लंबे समय तक रुकावट की आशंका ने Oil Market में volatility बढ़ा दी है।
Market participants अब यह देख रहे हैं कि shipping disruptions कितने लंबे समय तक जारी रहते हैं और इसका Global Oil Supply पर कितना असर पड़ता है।
2026 में Crude Oil $100 के आसपास रह सकता है
Capital Economics ने 2026 के बाकी हिस्से में Oil Price करीब $100 प्रति barrel रहने का अनुमान लगाया है।
इसके analysts का यह भी अनुमान है कि Middle East से Energy Supply 2027 की शुरुआत तक भी युद्ध से पहले के स्तर पर वापस नहीं आ सकती।
यह अनुमान पहले की उस उम्मीद से अलग है जिसमें शुरुआती supply shock के बाद Oil Prices में नरमी आने की संभावना जताई गई थी।
अगर crude लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो इसका असर Oil Importing Countries पर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
महंगा Crude भारत के लिए क्यों चिंता की बात है?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा Crude Oil Imports के जरिए पूरा करता है। इसलिए International Market में Oil महंगा होने पर देश का Import Bill बढ़ सकता है।
इसका असर कई स्तरों पर दिखाई दे सकता है
- रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
- Inflationary pressure बढ़ सकता है।
- कंपनियों की input और transportation cost बढ़ सकती है।
- सरकार और कंपनियों के लिए energy cost बढ़ सकती है।
- लंबे समय तक महंगा crude रहने पर Corporate Earnings प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि, Crude की तेजी का असर सभी कंपनियों और sectors पर एक जैसा नहीं होता।
जिन कंपनियों की लागत में Fuel और Energy का हिस्सा ज्यादा है, उनके margins पर दबाव आ सकता है। वहीं कुछ Oil Producing और Upstream कंपनियों को ऊंची crude कीमतों से फायदा मिल सकता है।
IT Stocks की कमजोरी ने बाजार को और दबाया
Market की गिरावट में IT Stocks की बिकवाली भी एक बड़ा कारण रही।
Nifty IT Index में 3% से ज्यादा की गिरावट आई। Coforge का शेयर करीब 5% तक टूट गया।
कंपनी ने 8 सितंबर 2026 से Non-Executive Independent Director और Chairman Om Prakash Bhatt के तत्काल प्रभाव से इस्तीफे की घोषणा की थी। इसके बाद शेयर में दबाव देखने को मिला।
IT sector का Nifty में महत्वपूर्ण weight है। इसलिए Infosys, TCS, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे बड़े stocks में एक साथ बिकवाली होने पर पूरे Nifty पर इसका असर बढ़ जाता है।
आगे बाजार की दिशा किन चीजों पर निर्भर करेगी?
Nifty का 23,431 पर बंद होना बताता है कि फिलहाल बाजार पर External Risks का दबाव बना हुआ है।
आने वाले दिनों में इन factors पर खास नजर रहेगी
1. Crude Oil Price क्या Brent लंबे समय तक $100 के आसपास रहता है?
2. Middle East Conflict क्या तनाव और बढ़ता है या बातचीत/ceasefire की संभावना बनती है?
3. Strait of Hormuz Oil और shipping movement पर कोई बड़ा disruption होता है या नहीं?
4. IT Stocks बड़े IT shares में बिकवाली जारी रहती है या recovery आती है?
5. Foreign Investors Global risk बढ़ने पर FII flows किस दिशा में जाते हैं?
Indian Stock Market Outlook
अगर Crude Oil लंबे समय तक $100 के आसपास बना रहता है और Middle East में तनाव कम नहीं होता, तो भारतीय शेयर बाजार पर दबाव जारी रहने की आशंका बनी रह सकती है।
महंगा crude भारत के Import Bill, Rupee और Inflation के लिए चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही IT stocks में कमजोरी और Foreign Investors की sentiment भी Nifty की चाल को प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल बाजार लगातार तीसरे सत्र गिरावट के बाद ऐसे दौर में है जहां Global Geopolitical Developments और Crude Oil Prices Domestic Market के लिए सबसे बड़े triggers में शामिल हो गए हैं।
आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर खास तौर पर Crude Oil, Middle East Conflict, Hormuz Strait और IT Stocks पर रहेगी। जब तक इन मोर्चों पर uncertainty कम नहीं होती, बाजार में volatility ऊंची रह सकती है।
