Stock Market Crash 29 मई को बाजार में बड़ी गिरावट निवेशकों को ₹5 लाख करोड़ का नुकसान
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। पूरे कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों की सतर्कता और लगातार बिकवाली के दबाव के चलते प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ बंद हुए। कमजोर वैश्विक संकेत, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर मानसून की आशंका और MSCI रीबैलेंसिंग जैसे कई कारणों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
कारोबार के अंत में BSE Sensex 1,092 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 74,775.74 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 भी 359 अंक टूटकर 23,547.75 के स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट करीब 1.5 प्रतिशत के आसपास रही, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
India VIX में तेज उछाल, बढ़ी बाजार की घबराहट
बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर India VIX पर भी दिखाई दिया। निवेशकों के बीच डर और अस्थिरता बढ़ने के कारण India VIX लगभग 9 प्रतिशत उछलकर 16.35 के स्तर पर पहुंच गया। आमतौर पर VIX में तेजी यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
निवेशकों की संपत्ति में ₹5 लाख करोड़ की कमी
शुक्रवार की बिकवाली ने निवेशकों की संपत्ति पर भी बड़ा असर डाला। BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 466 लाख करोड़ रुपये रह गया। यह दर्शाता है कि बाजार में बिकवाली कितनी व्यापक थी।
किन शेयरों ने बाजार को नीचे खींचा?
दिन के दौरान अधिकांश सेक्टर दबाव में रहे और कई बड़े लार्ज-कैप शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले प्रमुख शेयर
- Power Grid Corporation में 4% से अधिक की गिरावट
- InterGlobe Aviation (IndiGo) में 3% से ज्यादा कमजोरी
- Bajaj Finance में 2% से अधिक गिरावट
- UltraTech Cement में तेज बिकवाली
- Tata Steel में कमजोरी
- Sun Pharma में गिरावट
- NTPC के शेयर भी दबाव में रहे
इन दिग्गज शेयरों में गिरावट ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर नकारात्मक असर डाला।
कमजोर मानसून का अनुमान बना चिंता का कारण
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में से एक भारतीय मौसम विभाग (IMD) का ताजा अनुमान रहा।
IMD के अनुसार जून से सितंबर के बीच मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और वर्षा का स्तर Long Period Average (LPA) के लगभग 90 प्रतिशत तक रहने की संभावना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो यह पिछले 11 वर्षों के सबसे कमजोर मानसून में से एक हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर मानसून के कारण
- कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है
- खाद्य महंगाई बढ़ सकती है
- ग्रामीण मांग कमजोर पड़ सकती है
- आर्थिक विकास की रफ्तार प्रभावित हो सकती है
इसी संभावना ने निवेशकों को सतर्क कर दिया और बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।
Middle East तनाव ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्षविराम को आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई है, लेकिन अंतिम मंजूरी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को आशंका है कि यदि क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ सकता है।
FII की लगातार बिकवाली से बढ़ा दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने हालिया कारोबारी सत्र में लगभग 1,043 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मई महीने के दौरान विदेशी निवेशक अधिकांश कारोबारी सत्रों में नेट सेलर रहे हैं।
लगातार विदेशी पूंजी के बाहर निकलने से
- बाजार में लिक्विडिटी कम होती है
- निवेशकों का विश्वास प्रभावित होता है
- बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ता है
यही कारण है कि बाजार पर लगातार दबाव बना हुआ है।
MSCI Rebalancing का भी दिखा असर
शुक्रवार को MSCI रीबैलेंसिंग का असर बाजार में साफ दिखाई दिया। ट्रेडिंग के अंतिम घंटे में कई शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
MSCI Standard Index में कुछ भारतीय कंपनियों को शामिल किया गया, जबकि कुछ कंपनियों को बाहर किया गया। इंडेक्स में बदलाव के कारण वैश्विक फंड्स को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना पड़ा, जिससे कई शेयरों में अचानक खरीदारी और बिकवाली दोनों देखने को मिलीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि MSCI रीबैलेंसिंग के कारण आखिरी घंटे में बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
आगे बाजार की दिशा कैसी रह सकती है?
आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी
- मानसून की वास्तविक प्रगति
- विदेशी निवेशकों का रुख
- वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम
- कच्चे तेल की कीमतें
- घरेलू आर्थिक आंकड़े
यदि इन मोर्चों पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जा रही है।
निष्कर्ष
29 मई का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। Sensex और Nifty में बड़ी गिरावट के साथ निवेशकों को लगभग ₹5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। कमजोर मानसून की आशंका, FII बिकवाली, Middle East तनाव और MSCI रीबैलेंसिंग जैसे कई कारणों ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए सोच-समझकर निवेश निर्णय लेने चाहिए।
अस्वीकरण शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या निवेश विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
