सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला वानतारा में एनिमल परचेज पूरी तरह नियमों के तहत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि जामनगर स्थित वानतारा (Greens Zoological Rescue and Rehabilitation Centre) में जानवरों की खरीद (Animal Purchase) कानून और नियमों के अनुसार की गई है। कोर्ट ने कहा कि जानवरों को रेग्युलेटरी सिस्टम के तहत रखा गया है। इसके साथ ही कोर्ट ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।

SIT जांच के नतीजे
SIT जांच में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या उल्लंघन नहीं मिला। टीम को यह जांचने का निर्देश दिया गया था कि भारत और विदेशों से जानवरों की खरीद, विशेषकर हाथियों की खरीद, के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।
बेंच और बयान
जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पी. बी. वराले की बेंच ने SIT रिपोर्ट को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाते हुए कहा कि अथॉरिटीज ने वानतारा की प्रक्रियाओं पर संतोष जताया है।
SIT की अगुवाई और पृष्ठभूमि
SIT की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जे. चेलमेश्वर ने की। वे कोलेजियम सिस्टम की आलोचना और महत्वपूर्ण फैसलों में अपनी अलग राय के लिए जाने जाते हैं। 2015 में जब सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल जुडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) को रद्द किया था, तब वे इकलौते जज थे जिन्होंने असहमति जताई थी।
SIT का गठन और पूर्व सुनवाई
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यीय SIT का गठन किया था ताकि वानतारा में एनिमल परचेज से जुड़ी शिकायतों की तथ्य-आधारित जांच हो सके। जांच में पाया गया कि किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ।
पिछली सुनवाई में, कोर्ट ने सी. आर. जया सुकीन की याचिका को “पूरी तरह अस्पष्ट” बताया था, जिसमें वानतारा के हाथियों को उनके मालिकों को लौटाने और मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की मांग की गई थी।
