Suzlon Energy Stock में लगातार तीसरे दिन दबाव, 52-Week Low के करीब पहुंचा शेयर
विंड टर्बाइन बनाने वाली प्रमुख कंपनी Suzlon Energy के शेयरों में लगातार तीसरे ट्रेडिंग सेशन में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बीते तीन दिनों में स्टॉक करीब 3% तक टूट चुका है, जिसके बाद यह अपने एक साल के निचले स्तर (52-Week Low) के काफी करीब पहुंच गया है।
फिलहाल BSE पर Suzlon Energy का शेयर 1.48% की गिरावट के साथ ₹47.27 पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इंट्रा-डे में यह ₹47.15 तक फिसल गया। कंपनी का 52-Week Low ₹46.00 है, जिसे इसने 7 अप्रैल 2025 को छुआ था।
इस गिरावट के बाद निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या Suzlon Energy अब निचले स्तरों पर Buying Opportunity दे रहा है।
Suzlon Energy Share Price One-Year Low से High तक का सफर
पिछले एक साल में Suzlon Energy के शेयरों ने जबरदस्त उतार-चढ़ाव दिखाया है।
- 7 अप्रैल 2025 ₹46.00 (52-Week Low)
- 30 मई 2025 ₹74.30 (52-Week High)
सिर्फ दो महीने से भी कम समय में शेयर ने 61.52% की तेज रैली दिखाई थी। हालांकि, इसके बाद से स्टॉक में मुनाफावसूली और सेक्टर से जुड़ी चिंताओं के कारण फिर से दबाव देखने को मिल रहा है।

Suzlon Energy Target Price Brokerage क्या कहती है?
घरेलू ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने Suzlon Energy पर अपनी Buy Rating बरकरार रखी है।
- Target Price ₹74
- Upside Potential मौजूदा स्तर से लगभग 56% से ज्यादा
खास बात यह है कि Suzlon Energy को कवर करने वाले सभी Analysts ने इस स्टॉक पर Buy Recommendation दी है। फिलहाल किसी भी ब्रोकरेज ने Hold या Sell की सलाह नहीं दी है।
Motilal Oswal क्यों है Suzlon Energy पर Bullish?
ब्रोकरेज के अनुसार हालिया गिरावट के पीछे कुछ Short-Term Factors जिम्मेदार हैं:
- Renewable Energy Tenders में Wind Segment की कम हिस्सेदारी
- Wind Installations में अस्थायी सुस्ती
- Wind Sector में बढ़ती Competition
Motilal Oswal ने बताया कि करीब 40 GW के Pending PPAs में से लगभग 17 GW Pure Solar Projects से जुड़े हैं, जबकि Wind Projects की हिस्सेदारी फिलहाल सीमित बनी हुई है।
Wind Energy Demand Outlook 2030 तक मजबूत ग्रोथ की उम्मीद
हालांकि, ब्रोकरेज को Medium से Long Term में Wind Energy की मांग को लेकर मजबूत भरोसा है।
- Data Centers
- Commercial & Industrial (C&I) Consumers
- Public Sector Units (PSUs)
इन सभी सेगमेंट्स से बढ़ती मांग के चलते 2030 तक Wind Energy Demand में 20–24 GW का इजाफा हो सकता है। यह आंकड़ा भारत के 100 GW Wind Capacity Target (FY2030) से भी अधिक हो सकता है।
Order Book और EPC Strategy से मिलेगा Competitive Advantage
Motilal Oswal के मुताबिक Suzlon Energy की Order Book में करीब 50% हिस्सेदारी EPC Projects की है, जो मौजूदा Competitive माहौल में कंपनी के लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
- Suzlon का Execution Track Record मजबूत
- EPC Space में Chinese OEMs की सीमित मौजूदगी
- Large और Complex Projects जीतने की बेहतर क्षमता
इन कारणों से Suzlon को अन्य घरेलू कंपनियों की तुलना में बढ़त मिलती नजर आ रही है।
Export Demand और Management का Long-Term Vision
Suzlon Management को आने वाले वर्षों में Export Demand से भी बड़ा सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
- FY2027 की शुरुआत में नए Export Orders की संभावना
- FY2028 से Supply शुरू होने की उम्मीद
दावोस में CNBC-TV18 से बातचीत में Suzlon Group के Executive Vice Chairman Girish Tanti ने कहा कि:
- अगले 2 साल में 10 GW का आंकड़ा पार किया जाएगा
- Annual Manufacturing Capacity करीब 20 GW
- 2030 तक Capacity 13–15 GW तक पहुंच सकती है
निष्कर्ष (Conclusion)
Suzlon Energy के शेयरों में भले ही Short Term में दबाव देखने को मिल रहा हो, लेकिन:
- Strong Order Book
- EPC Strategy
- Rising Wind Energy Demand
- Positive Brokerage Outlook
इन सभी फैक्टर्स के चलते Long Term Growth Story अभी भी मजबूत बनी हुई है।
निवेश से पहले अपने Financial Advisor से सलाह जरूर लें।
